द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : इजरायल दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। इजरायल की धरती से उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि भारत और इजरायल लंबे समय से आतंकवाद और उसके समर्थकों के विरुद्ध कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं और भविष्य में भी यह सहयोग और मजबूत होगा। उनके इस बयान को दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के मुद्दों से सीधे जुड़ा है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों से संबंधित है। इसलिए भारत हमेशा संवाद और कूटनीतिक समाधान का समर्थक रहा है। उन्होंने गाजा शांति योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में सकारात्मक पहल हुई है। दौरे के दौरान उन्होंने इजरायली नेतृत्व के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की, जिसमें सुरक्षा, रणनीतिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी प्रमुख रहे।
भारत-इजरायल संबंधों को नई ऊंचाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 2017 में इजरायल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने का अवसर उनके लिए ऐतिहासिक था और इस बार की यात्रा भी भावनात्मक रूप से विशेष है। इजरायली संसद द्वारा दिए गए सम्मान को उन्होंने भारत के 140 करोड़ नागरिकों के प्रति सम्मान बताया।
दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा देने का निर्णय लिया है। यह साझेदारी लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी विश्वास और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित है। व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्ष हुए BTA समझौते के बाद अब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम तेज किया जाएगा। टेक्नोलॉजी सहयोग को नई प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत इजरायल में UPI के उपयोग को लेकर भी समझौता हुआ है।
रक्षा, कृषि और इनोवेशन में विस्तार
रक्षा क्षेत्र में दशकों पुराने सहयोग को और व्यापक बनाया जाएगा। दोनों देश ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी और जॉइंट प्रोडक्शन के जरिए रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करेंगे। कृषि क्षेत्र में इजरायल की उन्नत तकनीकों का लाभ भारतीय किसानों तक पहुंचाने के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की संख्या 100 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ‘विलेज ऑफ एक्सीलेंस’ मॉडल के माध्यम से आधुनिक कृषि पद्धतियों को ग्रामीण भारत तक ले जाने की योजना है।
इसके अतिरिक्त, भारत में इंडिया-इजरायल इनोवेशन एग्रीकल्चर सेंटर और इंडिया-इजरायल एकेडमिक फोरम की स्थापना से शोध, शिक्षा और स्टार्टअप सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी स्तर पर और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

