द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक बार फिर भारत-अमेरिका व्यापार (India-US Trade Deal) समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस डील को ‘स्पष्ट रूप से एकतरफा’ बताते हुए इसे फिलहाल रोकने की मांग की। रमेश ने सवाल उठाया कि जब अमेरिका ने भारतीय सोलर मॉड्यूल्स पर 125.87 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया है, तो यह समझौता भारत के निर्यात के लिए किस तरह फायदेमंद माना जा सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए रमेश ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आने वाले सोलर मॉड्यूल्स पर भारी शुल्क लगाना इस बात का संकेत है कि व्यापार समझौते को लेकर अमेरिका की प्रतिबद्धता कितनी मजबूत है। उन्होंने तंज कसते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप की दोस्ती का जिक्र किया और पूछा कि अगर डील इतनी लाभकारी है तो भारतीय उत्पादों पर इतने ऊंचे टैरिफ क्यों लगाए जा रहे हैं।
रमेश के अनुसार, इस समझौते के तहत भारत को अमेरिकी आयात पर छूट देनी पड़ रही है, जबकि भारत के निर्यात को अमेरिकी प्रशासन की नीतियों और फैसलों पर निर्भर रहना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा स्वरूप में यह समझौता देश के लाखों किसानों के हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया? कांग्रेस का सवाल
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को इस डील के फ्रेमवर्क पर सहमति देने से पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए था। हाल ही में United States Supreme Court ने 6-3 के फैसले में माना कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत व्यापक आयात शुल्क लगाने में प्रशासन ने अपनी सीमाओं का अतिक्रमण किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर लगाने की शक्ति मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है।
हालांकि बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक टैरिफ को 15 प्रतिशत के स्तर तक बढ़ाने की घोषणा की। रमेश का तर्क है कि भारत अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बातचीत करता तो बेहतर शर्तों पर समझौता कर सकता था। उन्होंने सवाल किया कि 2 फरवरी 2026 को जल्दबाजी में फ्रेमवर्क पर सहमति क्यों दी गई, जबकि 20 फरवरी को कोर्ट का संभावित निर्णय तय था।
कांग्रेस नेता का आरोप है कि यह समझौता भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों से समझौता कर सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस डील पर पुनर्विचार करे और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे।

