द लोकतंत्र/ पटना : जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने बिहार में शराबबंदी कानून को असफल बताते हुए हटाने की बात कही। आरजेडी ने सरकार पर निशाना साधा, जबकि जेडीयू और बीजेपी ने बयान को व्यक्तिगत राय बताया।
बिहार में लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने कानून की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बिहार में शराबबंदी समाप्त हो जाए तो बेहतर होगा, क्योंकि यह सफल नहीं रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब शराबबंदी कानून के समर्थन में शपथ दिलाई जा रही थी, तब वे उसमें शामिल नहीं हुए थे और उन्होंने शपथ नहीं ली थी।
देवेश चंद्र ठाकुर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। सोमवार (02 मार्च 2026) को आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सच है कि देवेश चंद्र ठाकुर और ललन सिंह ने उस समय शपथ नहीं ली थी, जब विधानसभा से शराबबंदी कानून पारित हो रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के भीतर ही शराबबंदी को लेकर मतभेद हैं।
आरजेडी का हमला: सरकार के इशारे पर दिया गया बयान?
आरजेडी ने इसे सरकार की सोची-समझी रणनीति करार दिया। शक्ति सिंह यादव ने कहा कि जब सत्तारूढ़ दल के नेता ही शराबबंदी की समीक्षा या इसे हटाने की बात कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार स्वयं इस कानून से पीछे हटना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि पटना हाईकोर्ट ने सूखे नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
आरजेडी का आरोप है कि देवेश चंद्र ठाकुर का बयान व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सरकार के इशारे पर दिया गया है। उनके अनुसार, यह शराबबंदी कानून की विफलता को स्वीकार करने जैसा है।
जेडीयू और बीजेपी ने बताया व्यक्तिगत राय
देवेश चंद्र ठाकुर के बयान से जेडीयू ने दूरी बनाते हुए इसे उनकी व्यक्तिगत राय बताया। जेडीयू प्रवक्ता अंजुम आरा ने कहा कि बिहार में शराबबंदी का निर्णय सभी दलों की सहमति से लिया गया था और इसे सामाजिक सुधार की दिशा में साहसिक कदम माना गया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस फैसले की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहना की थी।
उधर बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि शराबबंदी से विशेष रूप से महिलाओं को लाभ हुआ है। उनके अनुसार, शराब के कारण घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों में कमी आई है। वहीं चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) ने भी कानून के समर्थन में खड़े रहने की बात कही और बयान को व्यक्तिगत बताया।
बिहार में शराबबंदी लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का विषय रही है। अब जेडीयू सांसद के बयान ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक राजनीतिक गर्माहट बढ़ा सकता है।

