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1 करोड़ की उगाही मामले में लॉरेंस बिश्नोई को बड़ी राहत, साकेत कोर्ट ने सबूतों के अभाव में किया बरी

Lawrence Bishnoi gets major relief in Rs 1 crore extortion case, Saket court acquits him due to lack of evidence

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : दिल्ली के साकेत कोर्ट ने वकील से 1 करोड़ रुपये की उगाही के कथित मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और दो अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोप केवल खुलासे के बयानों पर आधारित थे। दिल्ली की Saket Court ने गैंगस्टर Lawrence Bishnoi को एक करोड़ रुपये की कथित उगाही से जुड़े मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में लॉरेंस बिश्नोई समेत दो अन्य आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया।

यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें एक वकील से एक करोड़ रुपये की मांग और धमकी भरे फोन कॉल का आरोप लगाया गया था। मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लॉरेंस बिश्नोई, हरेन सरापदादिया और आशीष शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) नुपुर गुप्ता ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ केवल उनके कथित खुलासे के बयान ही रिकॉर्ड में मौजूद हैं, जो आरोप तय करने के लिए पर्याप्त नहीं माने जा सकते।

अदालत ने कहा- उगाही साबित करने के लिए संपत्ति का हस्तांतरण जरूरी

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 386 के तहत उगाही का अपराध तभी बनता है जब धमकी के कारण किसी व्यक्ति से वास्तव में धन, संपत्ति या कोई मूल्यवान वस्तु ली गई हो।

मामले में शिकायतकर्ता ने केवल इतना आरोप लगाया था कि उन्हें अज्ञात नंबर से कॉल कर एक करोड़ रुपये की मांग की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। लेकिन शिकायत या चार्जशीट में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि किसी प्रकार की रकम या संपत्ति आरोपियों को दी गई। अदालत ने कहा कि केवल धमकी या मांग करना उगाही का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जब तक कि उसके परिणामस्वरूप संपत्ति का वास्तविक हस्तांतरण न हुआ हो।

पुलिस जांच और मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता रमनदीप सिंह ने पुलिस को बताया था कि 23 और 24 अप्रैल की रात उन्हें एक अज्ञात नंबर से कई कॉल आए, जिनमें उनसे एक करोड़ रुपये की मांग की गई। शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने Delhi Police के सनलाइट कॉलोनी थाने में मामला दर्ज किया था। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने जांच कर चार आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 386, 387 और 120बी के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

हालांकि अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत या बरामदगी नहीं हुई है और गिरफ्तारी मुख्य रूप से सह-आरोपियों के खुलासे के आधार पर की गई थी। इसी आधार पर अदालत ने लॉरेंस बिश्नोई, हरेन सरापदादिया और आशीष शर्मा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

Team The Loktantra

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