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ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) कानून में बड़ा बदलाव! लोकसभा में पेश हुआ संशोधन बिल, पहचान और सुरक्षा को लेकर नई व्यवस्था

Major Change in Transgender Rights Law! Amendment Bill Introduced in Lok Sabha; New Provisions for Identity and Protection

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा में ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन बिल 2026 पेश किया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। यह संशोधन 2019 में लागू ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अधिनियम में बदलाव का प्रस्ताव रखता है। सरकार का कहना है कि कानून के क्रियान्वयन के दौरान कुछ व्यावहारिक समस्याएं सामने आई थीं, खासकर ट्रांसजेंडर की परिभाषा और उनकी पहचान को लेकर।

बिल के अनुसार, सरकार का उद्देश्य उन लोगों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करना है जो जैविक कारणों से सामाजिक भेदभाव और बहिष्कार का सामना करते हैं। सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून में ट्रांसजेंडर की परिभाषा काफी व्यापक और अस्पष्ट है, जिससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में किन लोगों को इस कानून के तहत संरक्षण और लाभ मिलना चाहिए।

इसी कारण नए संशोधन के जरिए अधिक सटीक परिभाषा तय करने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि कानून का लाभ उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है।

अपराधों पर सख्त प्रावधान और पहचान प्रक्रिया में सुधार

प्रस्तावित संशोधन बिल में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों को लेकर भी सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। वर्तमान कानून में दंड के रूप में अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन सरकार का मानना है कि कई गंभीर अपराधों के लिए यह पर्याप्त नहीं है। नए संशोधन में अपहरण, जबरन शारीरिक नुकसान पहुंचाना, शरीर के अंगों के साथ छेड़छाड़, जबरन हार्मोन थेरेपी कराना या किसी व्यक्ति को जबरन ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने के लिए मजबूर करना जैसे अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का प्रस्ताव है। इन अपराधों के लिए अधिक कठोर और चरणबद्ध सजा का प्रावधान किया गया है।

बिल में यह भी प्रस्ताव है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अपने आधिकारिक दस्तावेजों में आवश्यक बदलाव करने का अधिकार दिया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित मामलों में विशेषज्ञों की सलाह लेने के लिए एक सक्षम प्राधिकरण नियुक्त करने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। इसके अलावा नेशनल काउंसिल फॉर ट्रांसजेंडर पर्सन्स की संरचना में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों को क्षेत्रीय आधार पर शामिल किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय को बेहतर कानूनी संरक्षण देना और उनके अधिकारों को प्रभावी तरीके से लागू करना है, ताकि समाज में उन्हें सम्मान और सुरक्षा मिल सके।

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Team The Loktantra

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