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ईरान युद्ध में बड़ा खुलासा: ट्रंप का दावा- पाकिस्तान के जरिए पहुंचीं मिसाइलें, चीन की भूमिका पर सवाल

Major Revelation in Iran Conflict: Trump Claims Missiles Arrived via Pakistan; Questions Raised Over China's Role

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर एक बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। ट्रंप के अनुसार, तेहरान की ओर से अमेरिकी वॉरशिप्स पर दागी गई 100 से अधिक मिसाइलें पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुंचाई गई थीं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस सप्लाई चेन के पीछे चीन की भूमिका रही, जिसने पाकिस्तान के जरिए ईरान को सैन्य सहायता उपलब्ध कराई। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना ने इन सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित सीजफायर के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है।

सीजफायर के बाद भी हमले, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद हालात फिर बिगड़ने लगे। ईरान में एक रिफाइनरी पर हमले की खबर सामने आई, वहीं कुवैत और बहरीन पर ईरान की ओर से हमले किए जाने के दावे भी सामने आए। दूसरी तरफ इजरायल ने लेबनान पर मिसाइल हमले तेज कर दिए, जिससे संघर्ष विराम की स्थिति और कमजोर पड़ गई।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि उनका “मिशन अभी अधूरा” है और लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं ईरान ने चेतावनी दी कि यदि लेबनान पर हमले नहीं रुके, तो सीजफायर का कोई मतलब नहीं रहेगा। इन घटनाओं के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई।

होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं

हालांकि बाद में ईरान ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। ईरान के उप-विदेश मंत्री के अनुसार, यह जलमार्ग नागरिक जहाजों के लिए खुला है, लेकिन सुरक्षा कारणों से यहां से गुजरने वाले सभी जहाजों की कड़ी जांच की जा रही है।

अब केवल उन्हीं जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है, जिन्हें ईरानी अधिकारियों से पूर्व अनुमति प्राप्त है। इस सख्त निगरानी के चलते जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है, जिसका असर वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ जहां बड़े स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां लगातार जारी हैं, जो इस बात का संकेत देती हैं कि मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

कुल मिलाकर, ट्रंप के दावों ने इस संघर्ष को एक नया आयाम दे दिया है, जिसमें पाकिस्तान और चीन की संभावित भूमिका पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या यह टकराव और गहरा होता है।

यह भी पढ़ें : देवरिया के सौम्य वत्सल मिश्र ने ISRO के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में बढ़ाया मान, SMOPS-2026 में की सहभागिता

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