द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला और कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन ‘MGNREGA बचाओ संग्राम’ (MGNREGA Bachao Sangram) की तीन प्रमुख मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा। खड़गे ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) कोई सरकारी कृपा या दान नहीं, बल्कि गरीबों और ग्रामीण श्रमिकों के लिए एक कानूनी गारंटी है, जिसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि कांग्रेस की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार हाल ही में लागू किए गए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB–G RAM G एक्ट को तत्काल वापस ले। इसके साथ ही मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जाए और ग्राम पंचायतों व ग्राम सभाओं के अधिकार पुनः स्थापित किए जाएं।
मनरेगा ने करोड़ों गरीबों को दिया सम्मान के साथ काम
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा के जरिए देश के करोड़ों सबसे गरीब लोगों को उनके गांव में ही काम मिला। इससे भूख, बेरोजगारी और मजबूरी में होने वाले पलायन में कमी आई। ग्रामीण मजदूरी में बढ़ोतरी हुई और महिलाओं की आर्थिक गरिमा को मजबूती मिली। खड़गे के मुताबिक, यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है, लेकिन नई VB–G RAM G व्यवस्था इसे धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश है।
VB–G RAM G एक्ट पर गंभीर आरोप
खड़गे ने आरोप लगाया कि नया कानून मनरेगा की अधिकार आधारित संरचना को खत्म करने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि अब काम ‘अधिकार’ नहीं रहेगा, बल्कि कुछ चुनिंदा पंचायतों में ‘अनुमति’ बन जाएगा। बजट सीमित कर दिया जाएगा, जिससे संकट के समय भी काम बीच में ही बंद हो जाएगा। दिल्ली से तय होगा कि कहां पैसा मिलेगा और कौन सा काम होगा, जिससे ग्राम सभा और पंचायतें अप्रासंगिक हो जाएंगी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 60 दिन का ‘वर्क ब्लैकआउट’ संकट के समय काम न देने को कानूनी बना देगा। मजदूरी अनिश्चित हो जाएगी और राज्यों पर 40 प्रतिशत खर्च का बोझ डालकर संघीय ढांचे को कमजोर किया जाएगा। बायोमेट्रिक और ऐप आधारित तकनीक के जरिए गरीब मजदूरों को बाहर करने का खतरा भी उन्होंने जताया।
देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने तीन चरणों में देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि पहला चरण 8 जनवरी से शुरू होगा, जिसमें प्रदेश और जिला स्तर पर बैठकें, प्रेस कॉन्फ्रेंस और 11 जनवरी को गांधी व आंबेडकर की प्रतिमाओं के पास एक दिन का उपवास किया जाएगा।
दूसरे चरण में पंचायत स्तर पर चौपाल, नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण होगा, जबकि तीसरे चरण में जिला और राज्य स्तर पर धरना-प्रदर्शन और देशभर में AICC की जोनल रैलियां आयोजित की जाएंगी। खड़गे ने साफ कहा कि मनरेगा पर हमला करोड़ों मजदूरों और उनके संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। कांग्रेस इस लड़ाई को शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ तरीके से हर पंचायत से लेकर संसद तक लड़ने के लिए तैयार है।

