द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुजरात के साणंद में Micron Technology की सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (Micron ATMP Sanand Inauguration) सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग आधुनिक तकनीकी ढांचे की आधारशिला है और कैमरा से लेकर मोबाइल तक हर उपकरण को मेमोरी चिप की आवश्यकता होती है।
उन्होंने बताया कि साणंद स्थित इस प्लांट में मेमोरी चिप्स का निर्माण होगा, जिससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। वैष्णव ने यह भी कहा कि देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन का बड़ा इकोसिस्टम विकसित हो चुका है और यहां अत्याधुनिक 2 नैनोमीटर चिप्स तक डिजाइन की जा रही हैं। आने वाले समय में भारत में डिजाइन की गई चिप्स का निर्माण भी यहीं होगा।
भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में ऐतिहासिक मील का पत्थर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस ATMP सुविधा में वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत भारत की तकनीकी नेतृत्व यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि यह संयंत्र भारत की भूमिका को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में और मजबूत करेगा।
उन्होंने सेमीकंडक्टर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्रांति का प्रमुख सेतु बताते हुए कहा कि यदि पिछली सदी में तेल वैश्विक अर्थव्यवस्था का नियंत्रक था, तो इस सदी में माइक्रोचिप वही भूमिका निभाएगी। प्रधानमंत्री ने भारत-अमेरिका सहयोग को भी रेखांकित करते हुए कहा कि एआई और चिप्स के क्षेत्र में दोनों लोकतांत्रिक देशों की साझेदारी वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएगी।
साणंद परियोजना को India Semiconductor Mission के तहत स्वीकृत पहला प्रस्ताव माना जाता है। सितंबर 2023 में इसका शिलान्यास हुआ था और 22,500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ इसका निर्माण तेज गति से पूरा किया गया।
वैश्विक मांग को पूरा करेगा साणंद प्लांट
साणंद ATMP सुविधा पूरी क्षमता से संचालित होने पर लगभग 5 लाख वर्ग फुट के क्लीनरूम स्पेस से सुसज्जित होगी, जो इसे विश्व के सबसे बड़े रेज्ड-फ्लोर क्लीनरूम में शामिल करेगी। यह संयंत्र माइक्रोन के वैश्विक नेटवर्क से प्राप्त DRAM और NAND वेफर्स को तैयार मेमोरी एवं स्टोरेज उत्पादों में बदलेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के बढ़ते उपयोग के चलते मेमोरी और स्टोरेज की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यह संयंत्र न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक बाजारों को भी आपूर्ति करेगा। यह परियोजना भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है और आत्मनिर्भर तकनीकी इकोसिस्टम के निर्माण के प्रधानमंत्री के विजन को साकार करती है।

