द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक एविएशन सेक्टर के साथ-साथ यात्रियों की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय एयरलाइंस ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में लगभग 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें और कई देशों द्वारा एयरस्पेस बंद किए जाने से उड़ानों की लागत में भारी इजाफा होना है।
दरअसल, ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष और होर्मुज रूट पर पैदा हुई बाधाओं के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की कीमतों पर पड़ा है। एविएशन सेक्टर से जुड़े जानकार बताते हैं कि किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च का करीब 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा जेट फ्यूल पर खर्च होता है। ऐसे में जब ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं तो एयरलाइंस के पास टिकट के दाम बढ़ाने के अलावा बहुत कम विकल्प बचते हैं।
इसके साथ ही करीब 10 से 12 देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। इसके चलते विमानों को लंबा और वैकल्पिक मार्ग अपनाकर उड़ान भरनी पड़ रही है। इससे न केवल ईंधन की खपत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है बल्कि कई उड़ानों का समय भी 3 से 4 घंटे तक बढ़ गया है। इसका असर टिकट की कीमतों और उड़ानों की उपलब्धता दोनों पर पड़ रहा है।
एयर इंडिया ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, हजारों उड़ानें रद्द
बढ़ती लागत के दबाव के बीच एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण ऑपरेटिंग लागत में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसके चलते यह फैसला लेना पड़ा।
एयर इंडिया के नए नियमों के तहत घरेलू और SAARC देशों के रूट पर प्रति यात्री 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाया गया है। वहीं मिडिल ईस्ट के रूट पर 10 डॉलर और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए 60 डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है। इसके अलावा अगले चरण में उत्तर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जाने वाली उड़ानों पर लगभग 200 डॉलर तक का अतिरिक्त सरचार्ज लगाने की योजना भी बनाई जा रही है।
टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी का असर किरायों में भी साफ दिखाई दे रहा है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली से लंदन की फ्लाइट का किराया, जो पहले सामान्यतः 32 हजार से 40 हजार रुपये के बीच रहता था, वह बढ़कर करीब 90 हजार रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह दिल्ली से अबू धाबी का किराया लगभग 11,875 रुपये से बढ़कर 17 हजार रुपये तक हो गया है, जबकि वापसी टिकट का किराया 42,990 रुपये तक पहुंच गया है।
बड़ी संख्या में रद्द हुई उड़ानें
इस बीच रेटिंग एजेंसी ICRA की रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी से 5 मार्च के बीच भारतीय एयरलाइंस को करीब 1,770 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। वैश्विक स्तर पर यह संख्या 27 हजार से अधिक बताई जा रही है। उड़ानें रद्द होने से एयरलाइंस को राजस्व नुकसान के साथ-साथ अतिरिक्त ईंधन और एयरपोर्ट शुल्क का भी बोझ उठाना पड़ रहा है। ICRA का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में भारतीय एयरलाइंस को लगभग 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये तक का शुद्ध घाटा हो सकता है। इस दबाव का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला, जहां इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
एयरलाइंस कंपनियों ने इस स्थिति को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय से राहत देने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि जेट फ्यूल पर टैक्स में कमी और एयरपोर्ट शुल्क में राहत दी जाए, ताकि बढ़ती लागत के दबाव को कम किया जा सके और यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

