द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोमवार को जाति जनगणना के मुद्दे पर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी ने पहले जाति जनगणना की मांग को सिरे से खारिज किया, लेकिन बाद में विपक्ष और जनदबाव के चलते उसी मांग को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। रमेश के मुताबिक यह सरकार के रुख में बड़ा और साफ यू-टर्न है।
कांग्रेस की मांग के सामने प्रधानमंत्री को झुकना पड़ा
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर याद दिलाया कि 28 अप्रैल 2024 को एक टीवी इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने जाति जनगणना की मांग करने वालों पर ‘अर्बन नक्सल मानसिकता’ होने का आरोप लगाया था। लेकिन रमेश का कहना है कि समय के साथ हालात बदले और कांग्रेस द्वारा लगातार उठाई जा रही इस मांग के सामने प्रधानमंत्री को झुकना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि यह विपक्ष की राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई की जीत है।
कांग्रेस नेता ने 2027 की जनगणना के प्रस्तावित कार्यक्रम का भी हवाला दिया। उनके अनुसार, जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा। वहीं दूसरा चरण जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे बर्फीले इलाकों में, जबकि देश के शेष हिस्सों में फरवरी 2027 में संपन्न होगा।
जाति जनगणना पर पीएम मोदी ने यू-टर्न लिया
नीति में बदलाव को रेखांकित करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को मोदी सरकार ने अचानक घोषणा की कि 2027 की जनगणना में जाति जनगणना को शामिल किया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले सरकार ने 20 जुलाई 2021 को संसद में और 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में जाति जनगणना के विचार को नकार दिया था। ऐसे में यह फैसला सरकार की पुरानी सोच से पूरी तरह उलट है।
रमेश ने हाल ही में जारी हाउस लिस्टिंग प्रश्नावली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रश्न संख्या 12 में केवल यह पूछा गया है कि परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या ‘अन्य’ श्रेणी से संबंधित है या नहीं, जबकि ओबीसी और सामान्य वर्ग के लिए कोई स्पष्ट विकल्प नहीं है। उनके मुताबिक, यह प्रारूप सरकार की मंशा पर संदेह पैदा करता है और इससे निष्पक्ष व व्यापक जाति जनगणना को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि केंद्र सरकार जाति जनगणना के ढांचे को अंतिम रूप देने से पहले सभी राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक समाज संगठनों से व्यापक परामर्श करे। जयराम रमेश ने तेलंगाना सरकार द्वारा 2025 में कराए गए SEEEPC सर्वे का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षा, रोजगार, आय और राजनीतिक भागीदारी जैसे पहलुओं पर विस्तृत जाति-आधारित आंकड़े ही समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रख सकते हैं।

