द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : अमेरिका ने विदेशी नागरिकों के लिए वीजा नियमों को और सख्त करते हुए बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि 2 अप्रैल 2026 से कुछ देशों के नागरिकों को B1 (बिजनेस) और B2 (टूरिस्ट) वीजा के लिए आवेदन करते समय 15,000 डॉलर (करीब 12 लाख रुपये) तक का बॉन्ड जमा करना होगा।
यह राशि एक तरह की सुरक्षा गारंटी होगी, जिसे उन आवेदकों को वापस कर दिया जाएगा जो वीजा की शर्तों का पालन करते हुए समय पर अमेरिका से लौट जाएंगे या यात्रा नहीं करेंगे। इस कदम का उद्देश्य उन मामलों को कम करना है, जहां लोग वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से अमेरिका में रुक जाते हैं।
ओवरस्टे रोकने और खर्च बचाने की रणनीति
ट्रंप प्रशासन के अनुसार, यह नीति खासतौर पर उन देशों के लिए लागू की गई है जहां से वीजा ओवरस्टे के मामले ज्यादा सामने आते हैं। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक इस योजना के तहत जारी किए गए वीजा में करीब 97 प्रतिशत लोग समय पर अपने देश लौटे हैं। इसके विपरीत पहले बड़ी संख्या में लोग तय समय से ज्यादा अमेरिका में रुक जाते थे, जिससे प्रशासन पर कानूनी और आर्थिक दबाव बढ़ता था।
अधिकारियों का कहना है कि किसी अवैध प्रवासी को वापस भेजने में औसतन 18,000 डॉलर का खर्च आता है। ऐसे में यह बॉन्ड सिस्टम न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स के करोड़ों डॉलर भी बचाएगा। इस नई नीति के तहत 12 और देशों को सूची में जोड़ा गया है, जिनमें कंबोडिया, इथियोपिया, जॉर्जिया, मंगोलिया और ट्यूनीशिया जैसे देश शामिल हैं। इससे पहले भी कई देशों पर यह नियम लागू था।
हालांकि भारत और पाकिस्तान इस सूची में शामिल नहीं हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने संकेत दिया है कि भविष्य में ओवरस्टे और इमिग्रेशन जोखिम के आधार पर अन्य देशों को भी इस नीति में शामिल किया जा सकता है।
यह कदम अमेरिका की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद सीमित अवधि के वीजा का दुरुपयोग रोकना और सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाना है।

