द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : दिल्ली प्रशासन में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। दिल्ली सरकार ने राजधानी को अब आधिकारिक रूप से 13 नए जिलों में पुनर्गठित कर दिया है और इसकी अधिसूचना जारी हो चुकी है। यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही उस प्रशासनिक समस्या का समाधान माना जा रहा है, जिसमें राजस्व जिलों, नगर निगम जोनों, एनडीएमसी और छावनी बोर्ड की सीमाएं एक समान नहीं होने के कारण जनता को योजनाओं का लाभ पाने, शिकायत निवारण, भूमि रिकॉर्ड और पंजीकरण जैसे कार्यों में बार-बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
सीमाओं की असमानता के चलते विभागों के बीच फाइलें घूमती रहती थीं और नागरिकों को यह भी स्पष्ट नहीं हो पाता था कि किस कार्यालय में जाना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब दिल्ली में नगर निगम जोन और राजस्व जिलों की सीमाएं समान कर दी गई हैं, जिससे शासन प्रक्रियाओं में स्पष्टता और जवाबदेही बढ़ेगी।
दिल्ली में अब 13 राजस्व जिले काम करेंगे
नई अधिसूचना के साथ दिल्ली में अब 13 राजस्व जिले काम करेंगे और प्रत्येक जिले में प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए एसडीएम कार्यालयों की संख्या 22 से बढ़ाकर 39 कर दी गई है। एसडीएम की संख्या भी 33 से बढ़कर 39 हो गई है, यानी अब सभी एसडीएम अपने-अपने क्षेत्र में बैठेंगे और जनता को किसी अन्य इलाके में भटकना नहीं पड़ेगा।
दिल्ली सरकार का लक्ष्य हर जिले में मिनी सचिवालय स्थापित करना है, ताकि नागरिक एक ही छत के नीचे भूमि रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, नगर निगम सेवाएं, लाइसेंस, शिकायत, सामुदायिक लाभ योजनाओं की जानकारी और अन्य सरकारी सुविधाएं हासिल कर सकें। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह परिवर्तन प्रशासन को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्षों पुरानी सीमा विवाद समस्या को उनकी सरकार ने केवल दस महीनों में हल कर दिया, जिसे पूर्व में टालते हुए कोई समाधान नहीं निकल रहा था।
अधिकारियों पर भार कम होगा और सीमाओं का भ्रम समाप्त
राज्यों के पुनर्गठन की योजना के लिए प्रारंभिक बजट के रूप में 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और आगे जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा। इस फैसले से जनता को सीधे लाभ मिलेगा, जैसे सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी, शिकायत निवारण तेज होगा, अधिकारियों पर भार कम होगा और सीमाओं का भ्रम समाप्त हो जाएगा।
नागरिकों को स्पष्ट रहेगा कि उनका इलाका किस प्रशासनिक ज़ोन में आता है, जिससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा और भूमि रिकॉर्ड, शहरी विकास और आपदा प्रबंधन अधिक प्रभावी रूप से संचालित हो सकेंगे। अब तक विसंगतियों के कारण जो फाइलें महीनों रुकती थीं, उनके निस्तारण की गति बढ़ेगी और नागरिकों को राहत मिलेगी।
कुल मिलाकर, दिल्ली के 13 जिलों का यह नया ढांचा राजधानी के प्रशासन के लिए एक बड़े परिवर्तन का संकेत है। शासन का डिजिटलीकरण और सेवाओं का विकेंद्रीकरण आने वाले समय में नागरिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाएगा। मिनी सचिवालय और फील्ड स्तर पर मजबूत व्यवस्था दिल्ली को एक संगठित, सुलभ और समयबद्ध प्रशासन मॉडल की ओर अग्रसर कर रही है। सरकार मानती है कि यह बदलाव दिल्ली के विकास की गति को तेज करेगा और यह नई व्यवस्था राजधानी में सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

