द लोकतंत्र/ पटना : बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्णिया से लोकसभा सांसद और कांग्रेस से जुड़े नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को वर्ष 1995 से जुड़े एक पुराने मामले में पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। विभिन्न दलों के नेताओं ने इस गिरफ्तारी को लेकर अपनी-अपनी राय रखी है, जिससे मामला अब कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।
तेज प्रताप यादव ने प्रदेश का माहौल प्रभावित होने की जताई आशंका
जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव ने पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने हाल ही में कुछ मुद्दों को उठाया था और इसके बाद उन्हें पुराने केस में गिरफ्तार किया गया। तेज प्रताप ने आशंका जताई कि इससे प्रदेश का माहौल प्रभावित हो सकता है और सरकार को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तेज प्रताप यादव ने इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल राजनीतिक पहचान मजबूत करने से कुछ हासिल नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करना अधिक महत्वपूर्ण है। उनके बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
पप्पू यादव को दो दिन की न्यायिक हिरासत
इधर, पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव को शनिवार को पटना की अदालत में पेश किया। अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब उनकी जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होने की उम्मीद है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। उनके वकील शिवानंदन भारती के अनुसार, अदालत को यह भी बताया गया कि सांसद की तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं है, जिसे न्यायालय ने नोटिस में लिया।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर रात पटना के मंदिरी स्थित उनके आवास से उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस दौरान वहां हाई-वोल्टेज माहौल देखने को मिला, जिसने घटना को और सुर्खियों में ला दिया। 31 साल पुराने मामले में हुई यह गिरफ्तारी कई सवाल खड़े कर रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना का असर बिहार की मौजूदा राजनीति पर पड़ सकता है, खासकर तब जब राज्य में पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे मामलों में अक्सर कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप साथ-साथ चलते हैं, जिससे जनचर्चा और बढ़ जाती है।
फिलहाल, सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जमानत को लेकर फैसला महत्वपूर्ण होगा। यह मामला न केवल न्यायिक प्रक्रिया की दिशा तय करेगा, बल्कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीतिक बयानबाजी को भी प्रभावित कर सकता है।

