द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 5 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। यह संबोधन ऐसे समय पर हो रहा है जब देश आर्थिक सुधारों, विदेश नीति और वैश्विक व्यापारिक दबावों से जुड़े कई अहम मुद्दों का सामना कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी अपने संबोधन में भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद, H-1B वीजा नियमों में बदलाव, और GST सुधार जैसे विषयों पर बात कर सकते हैं। हालांकि, सरकार ने आधिकारिक रूप से संबोधन के मुद्दों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री इन मामलों पर स्पष्ट संदेश देंगे।
GST सुधार से टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव
वित्त मंत्रालय ने 17 सितंबर 2025 को नए GST रेट्स की अधिसूचना जारी की, जो 22 सितंबर से लागू होंगी। यह सुधार भारत की टैक्स प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पहले जीएसटी में पांच मुख्य स्लैब थे – 0%, 5%, 12%, 18% और 28%। अब सरकार ने 12% और 28% के स्लैब खत्म कर दिए हैं और केवल दो मुख्य दरें – 5% और 18% लागू की हैं।
इसके अलावा, पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, शराब और लग्ज़री कारों जैसे उत्पादों पर 40% का उच्च टैक्स लगाया गया है। पहले इन पर उपकर (Cess) भी लगता था, लेकिन अब इसे हटा दिया गया है। यह कदम टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने और व्यवसायों के लिए अनुपालन को आसान बनाने की दिशा में उठाया गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इससे राजस्व संग्रहण में स्थिरता आएगी और उपभोक्ताओं के लिए मूल्य निर्धारण अधिक पारदर्शी होगा।
स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत पर पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से नागरिकों और उद्योगों को स्वदेशी अपनाने का आह्वान करते रहे हैं। उनका कहना है कि स्वदेशी उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देना केवल आर्थिक मजबूती का विषय नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने बार-बार कहा है कि जब देशवासी स्थानीय उद्योगों और किसानों द्वारा तैयार वस्तुओं का उपयोग करेंगे, तो इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री का मानना है कि ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। यही वजह है कि वे नागरिकों से आग्रह कर रहे हैं कि वे अपने दैनिक जीवन में भारतीय उत्पादों को अपनाएं और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करें।
भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद: व्यापारिक रिश्तों पर असर
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में टैरिफ विवाद ने जोर पकड़ा है। जुलाई 2025 में अमेरिका ने भारत पर reciprocal tariff लगाया, ताकि अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार खोला जा सके। लेकिन भारत के इस मांग को स्वीकार न करने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25% टैरिफ लागू कर दिया, जो 7 अगस्त से प्रभावी हुआ। इसके बाद रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिका ने अतिरिक्त 25% शुल्क लगा दिया। 27 अगस्त से भारत पर कुल 50% टैरिफ लागू हो चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर पहले ही स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा था कि वे किसी भी कीमत पर विदेशी दबाव में नहीं झुकेंगे। उन्होंने किसानों और उद्योगों के हितों को सर्वोपरि बताया और कहा कि भारत अपनी नीतियों में राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देगा। उम्मीद है कि आज के संबोधन में वे इस विवाद को सुलझाने और भारतीय निर्यातकों को राहत देने के उपायों पर संकेत दे सकते हैं।
H-1B वीजा नियमों में बदलाव: भारतीय पेशेवरों पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 अगस्त 2025 को H-1B वीजा नियमों में बड़ा बदलाव किया। नए प्रावधान के तहत, अब इस वीजा की फीस 1,00,000 अमेरिकी डॉलर कर दी गई है। यह शुल्क केवल नए आवेदकों पर लागू होगा और 21 सितंबर से प्रभावी होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका में काम करने वाले भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने का बोझ बढ़ेगा, जिससे कई फर्म स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता दे सकती हैं। पीएम मोदी इस मुद्दे पर भारतीय पेशेवरों और उद्योग जगत को आश्वस्त करने के लिए रणनीति साझा कर सकते हैं।

