द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में प्रस्तावित प्रधानमंत्री Narendra Modi का संबोधन हंगामे की भेंट चढ़ गया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के जवाब में प्रधानमंत्री को सदन में बोलना था, लेकिन लगातार जारी विरोध और शोर-शराबे के कारण उनका भाषण नहीं हो सका। इस घटनाक्रम के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे सच्चाई का सामना करने से डर रहे हैं, इसलिए सदन में नहीं आए।
सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर साधा निशाना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि उन्होंने पहले ही अंदेशा जताया था कि प्रधानमंत्री लोकसभा में नहीं आएंगे। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री डरे हुए हैं और सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते। वीडियो में राहुल गांधी दोपहर के समय यह कहते नजर आ रहे हैं कि उन्हें लगता है कि पीएम सदन में उपस्थित नहीं होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री आते, तो वे उन्हें एक किताब सौंपते और उस पर चर्चा की मांग करते। राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
आखिर क्यों नहीं हो सका प्रधानमंत्री का भाषण?
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस जारी थी, जिसका जवाब प्रधानमंत्री को देना था। कार्यवाही शुरू करते समय पीठासीन सभापति Sandhya Ray ने सांसदों से सदन चलने देने की अपील भी की, लेकिन विपक्ष का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा था। लगातार हंगामे के कारण प्रधानमंत्री अपना वक्तव्य पेश नहीं कर सके और संबोधन को टालना पड़ा। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है।
‘प्रधानमंत्री आते तो उन्हें किताब भेंट करता’
राहुल गांधी ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि अगर प्रधानमंत्री संसद में आते, तो वे उन्हें पूर्व सेना प्रमुख Manoj Mukund Naravane की लिखी एक किताब भेंट करते। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह किसी विपक्षी नेता या विदेशी लेखक की नहीं, बल्कि देश के पूर्व सेना प्रमुख की किताब है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने इस दावे पर पलटवार करते हुए कहा कि संबंधित किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठाए सवाल
राहुल गांधी के मुताबिक, किताब में उल्लेख है कि जब चीनी सेना भारतीय सीमा में दाखिल हुई थी, तब सेना प्रमुख को इंतजार कराया गया और अहम फैसले की घड़ी में जिम्मेदारी सेना पर छोड़ दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक नेतृत्व पीछे हट गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि वे इन मुद्दों को संसद में उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया और सरकार जवाब देने से बच रही है।
सियासी टकराव और तेज होने के संकेत
प्रधानमंत्री का टला हुआ संबोधन और उस पर राहुल गांधी के आरोप-प्रत्यारोप यह संकेत देते हैं कि बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। एक तरफ विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है, तो वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष के रवैये को सदन की कार्यवाही बाधित करने वाला बता रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जब लोकसभा की कार्यवाही दोबारा सुचारु होगी, तो क्या प्रधानमंत्री अपना संबोधन देंगे और क्या इस मुद्दे पर संसद में नई बहस छिड़ेगी।

