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NALSA कार्यक्रम में PM मोदी ने दिया संदेश, कानून की भाषा आम लोगों की होनी चाहिए

PM Modi's message at the NALSA event: The language of law should be that of the common people

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : PM मोदी ने शनिवार को न्याय तक सभी की समान पहुँच को लोकतंत्र की बुनियाद करार देते हुए कहा कि जीवन और व्यापार में वास्तविक सहजता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब देश में ‘Ease of Justice’ को मजबूत बनाया जाए।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा लीगल सर्विसेज डे के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्याय आम नागरिक तक उनकी भाषा में पहुँचना चाहिए ताकि वे कानून को समझ सकें और न्याय की प्रक्रिया में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। यह दो दिवसीय सम्मेलन 8–9 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

कानून की भाषा ऐसी होनी चाहिए जिसे न्याय पाने वाला आसानी से समझ सके

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सामाजिक न्याय की स्थापना तभी संभव है जब हर नागरिक चाहे वह सामाजिक रूप से पिछड़ा हो, आर्थिक रूप से कमजोर हो या हाशिए पर रह रहा हो न्याय पा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय व्यवस्था को आम भाषा में सरल बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है।

कानून की भाषा ऐसी होनी चाहिए जिसे न्याय पाने वाला आसानी से समझ सके। जब लोग अपनी भाषा में कानून समझते हैं, तो कानून का पालन बेहतर होता है और मुकदमों की संख्या भी घटती है, प्रधानमंत्री ने कहा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट फैसलों और कानूनी दस्तावेजों को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

न्याय हर नागरिक की पहुँच में हो

कार्यक्रम में मौजूद देश के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने महात्मा गांधी की पंक्तियों का स्मरण करते हुए कहा कि निर्णय लेते समय हमें सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका का उद्देश्य सदैव यह सुनिश्चित करना है कि न्याय केवल विशेषाधिकार प्राप्त लोगों तक न रहे, बल्कि यह हर नागरिक की पहुँच में हो। गवई ने प्रधानमंत्री की मौजूदगी को तीनों संस्थाओं की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम की शुरुआत में NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस सूर्यकांत ने मुफ्त कानूनी सहायता की आवश्यकता और उसकी संवैधानिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता सिर्फ तकनीक के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनशीलता और स्थानीय समझ के मेल से प्रभावशाली रूप से प्रदान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि भविष्य का लक्ष्य कानूनी सहायता को आसान, तेज और सुलभ बनाना होना चाहिए, जिससे कोई भी पीड़ित व्यक्ति न्याय प्राप्त करने के रास्ते में अकेला न पड़े।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने NALSA की उपलब्धियों की सराहना की

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और NALSA की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि 2015–16 में NALSA का बजट जहाँ 68 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर 400 करोड़ रुपये हो चुका है, जिसमें से 350 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। मेघवाल ने युवा वकीलों को कानूनी सहायता को ‘नागरिक केंद्रित सेवा’ के रूप में देखने की अपील की और कहा कि न्याय तक पहुँच को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के दौरान ‘Community Mediation Training Module’ का भी शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य समुदाय स्तर पर विवाद निपटान को बढ़ावा देना और अदालतों पर बोझ कम करना है। कुल मिलाकर, सम्मेलन में स्पष्ट संदेश दिया गया कि न्याय का अधिकार केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यवहारिक और सार्वभौमिक होना चाहिए। “Ease of Justice” को बढ़ावा देने की पहल देश को अधिक न्यायपूर्ण, संवेदनशील और सशक्त लोकतंत्र की ओर ले जाने का प्रयास है।

Team The Loktantra

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