द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने निजी क्षेत्र से विशेष आग्रह करते हुए कहा है कि कंपनियों को केवल मुनाफे पर केंद्रित रहने के बजाय गुणवत्ता, उत्पादकता और अनुसंधान पर अधिक ध्यान देना चाहिए। पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने भारत के आर्थिक परिवर्तन के अगले चरण में निजी क्षेत्र की निर्णायक भूमिका पर जोर दिया। अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ समझौतों तथा केंद्रीय बजट 2026 के बाद यह उनका पहला विस्तृत इंटरव्यू माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण और शहरीकरण के साथ-साथ ग्रामीण पृष्ठभूमि के लाखों युवा वैश्विक उद्योगों में अवसर तलाश रहे हैं। उनके लिए विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा क्षेत्र में व्यापक बदलाव जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत केवल उपभोक्ता बनकर आगे नहीं बढ़ सकता; उसे वैश्विक स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादक बनना होगा।
मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और स्टार्टअप क्रांति पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं (PLI) के माध्यम से भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूत किया गया है। उनका दावा है कि देश वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ रहा है और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकारों के दौरान विनिर्माण क्षेत्र को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे विकास के केंद्र में रखा है।
उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने हाल के वर्षों में निर्यात के नए रिकॉर्ड बनाए हैं और अब देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। पहले जहां मोबाइल फोन आयात किए जाते थे, वहीं अब वैश्विक ब्रांड भारत में उत्पादन कर रहे हैं। रक्षा निर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और केमिकल सेक्टर में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खिलौनों के निर्यात में भी वृद्धि हुई है और देश में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र ने नई ऊर्जा भरी है। पिछले दशक में स्टार्टअप की संख्या कुछ सौ से बढ़कर दो लाख से अधिक हो गई है, जिनमें कई विनिर्माण आधारित उद्यम शामिल हैं। इससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
बजट 2026 से मिलेगा नई रणनीति को बल
प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट 2026 मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को और सुदृढ़ करेगा। इसमें वैल्यू एडिशन, स्किल डेवलपमेंट और स्केल-अप रणनीति को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। उनका मानना है कि इससे आत्मनिर्भरता और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को गति मिलेगी।
उन्होंने निजी क्षेत्र से अपील की कि भारतीय कंपनियां अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाएं, नई तकनीकों को अपनाएं और सप्लाई चेन की क्षमता मजबूत करें। उनके अनुसार, प्रतिस्पर्धा केवल लाभ कमाने तक सीमित न रहकर गुणवत्ता और उत्पादकता पर आधारित होनी चाहिए। प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक रणनीति का केंद्र विनिर्माण, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा होगा।

