द लोकतंत्र/ असम : असम के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में पूर्वोत्तर क्षेत्र की उपेक्षा की गई। एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लिए पूर्वोत्तर केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि ‘अष्टलक्ष्मी’ है, जिसकी समृद्धि और आत्मनिर्भरता सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में संसद में पेश हुए केंद्रीय बजट के बाद यह उनका पूर्वोत्तर का पहला दौरा है और बजट में भी इस क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, पहले जब पूर्वोत्तर का नाम लिया जाता था तो लोगों के मन में खराब बुनियादी ढांचे की तस्वीर उभरती थी, लेकिन आज यहां ऐसे हाईवे बन रहे हैं जहां न केवल वाहन चलते हैं बल्कि विमान भी उतर सकते हैं। इसे उन्होंने ‘बदलते असम की नई पहचान’ बताया।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर राष्ट्र की अवधारणा को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि जो लोग मातृभूमि के प्रति सम्मान नहीं दिखाते, वे देश के हित में काम नहीं कर सकते। उन्होंने दावा किया कि एनडीए सरकार ने पूर्वोत्तर को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सड़कों, रेल, हवाई संपर्क और डिजिटल अवसंरचना में व्यापक निवेश किया है।
भाजपा कार्यकर्ताओं की सराहना और पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पार्टी आज जिस ऊंचाई पर है, उसका श्रेय समर्पित कार्यकर्ताओं को जाता है। उन्होंने स्वयं को गर्व से भाजपा का कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि संगठन की शक्ति ही पार्टी की असली ताकत है।
सभा के दौरान प्रधानमंत्री ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इस हमले के बाद भारत ने जिस तरह आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की, उसे पूरी दुनिया ने देखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और आतंक के खिलाफ भारत की नीति स्पष्ट है।
उन्होंने असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए मां कामाख्या और आदि शक्ति को नमन किया। प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब असम में इसी वर्ष के पहले छह महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में उनके भाषण को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि पूर्वोत्तर के समग्र विकास के बिना भारत की प्रगति अधूरी है और केंद्र सरकार इस क्षेत्र को देश की विकास यात्रा में अग्रणी स्थान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

