द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 72वीं राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने देशभर से आए खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं और राष्ट्र निर्माण में खेलों की भूमिका को रेखांकित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वॉलीबॉल और भारत की विकास यात्रा के बीच समानताएं बताते हुए कहा कि जैसे इस खेल में टीमवर्क, तालमेल और आपसी भरोसे की अहम भूमिका होती है, वैसे ही देश भी सामूहिक प्रयासों से आगे बढ़ता है।
वॉलीबॉल से मिलती है टीमवर्क और संतुलन की सीख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वॉलीबॉल संतुलन, सहयोग और इच्छाशक्ति का खेल है। यह खेल टीम भावना के जरिए खिलाड़ियों को एक-दूसरे से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति भी इसी सिद्धांत पर आधारित है, जहां हर व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी अहम होती है।
प्रधानमंत्री के शब्दों में, वॉलीबॉल हमें सिखाता है कि जीत हमारे तालमेल, आपसी विश्वास और टीम की तैयारी पर निर्भर करती है। जब हर कोई अपनी जिम्मेदारी निभाता है, तभी सफलता मिलती है। हमारा देश भी इसी तरह आगे बढ़ रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे खेल के मैदान से मिली सीख को जीवन में भी अपनाएं।
काशी में खिलाड़ियों का स्वागत, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की झलक
प्रधानमंत्री ने इस टूर्नामेंट के आयोजन स्थल वाराणसी को लेकर भी खुशी जाहिर की। वाराणसी से सांसद होने के नाते उन्होंने खिलाड़ियों का काशी में स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना उनके कठिन परिश्रम और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस चैंपियनशिप में देश के 28 राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सजीव तस्वीर पेश करती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बनारस खेल प्रेमियों का शहर रहा है और यहां कुश्ती, मुक्केबाजी, नौकायन और कबड्डी जैसे खेलों की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि काशी की ऊर्जा पूरे टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाएगी।
खेलों में सुधार और एथलीट-केंद्रित नीति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देश की खेल नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत का खेल मॉडल पूरी तरह एथलीट-केंद्रित है, जहां खिलाड़ियों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार ने खेल क्षेत्र में बड़े सुधार किए हैं, जिनमें राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम और ‘खेलो भारत नीति 2025’ जैसे कदम शामिल हैं। इन सुधारों से न केवल प्रतिभाओं को सही अवसर मिलेंगे, बल्कि खेलों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने सभी टीमों को शुभकामनाएं देते हुए खिलाड़ियों से राष्ट्रीय मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का आह्वान किया और कहा कि खेलों के माध्यम से भारत की पहचान और मजबूत होगी।

