द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रिसीव करने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के न पहुंचने पर विवाद खड़ा हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रपति पद का अपमान बताते हुए टीएमसी सरकार की आलोचना की। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान एक प्रोटोकॉल विवाद ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu शनिवार (7 मार्च 2026) को दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी स्थित बिधाननगर में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने पहुंचीं। हालांकि एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee मौजूद नहीं थीं, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने टीएमसी सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा से देशवासियों को गहरा दुख पहुंचा है और पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रपति प्रोटोकॉल को लेकर सारी सीमाएं पार कर दी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का पद देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और इसका सम्मान राजनीति से ऊपर होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को लेकर राज्य सरकार का रवैया बेहद लापरवाही भरा रहा है।
राष्ट्रपति ने भी जताई नाराजगी
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आयोजन स्थल में बदलाव को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि सम्मेलन पहले से तय स्थान पर आयोजित होता तो ज्यादा लोग इसमें शामिल हो सकते थे।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रशासन ने अंतिम समय में स्थान बदल दिया, जिसके कारण कई संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि आयोजन स्थल काफी दूर होने के कारण समुदाय के कई लोग सम्मेलन में नहीं पहुंच सके। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि प्रशासन ने ऐसी जगह क्यों चुनी जहां से लोगों के लिए कार्यक्रम में पहुंचना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि अगर सम्मेलन पहले तय स्थान पर होता तो यह ज्यादा प्रभावी और व्यापक भागीदारी वाला कार्यक्रम बन सकता था।
ममता बनर्जी की गैरमौजूदगी पर भी उठे सवाल
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाते हैं तो आमतौर पर मुख्यमंत्री और मंत्री उनका स्वागत करने पहुंचते हैं। हालांकि इस कार्यक्रम में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा कि वे भी बंगाल की बेटी हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन मानती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि मुख्यमंत्री उनके स्वागत के लिए क्यों नहीं आईं।
इस घटना के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और इसे राष्ट्रपति प्रोटोकॉल तथा राजनीतिक शिष्टाचार से जुड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।

