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एपस्टीन फाइल्स पर सियासी संग्राम, संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन

Political battle over Epstein files escalates, opposition protests in Parliament complex

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : एपस्टीन फाइल्स को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। शुक्रवार को संसद भवन परिसर के मकर द्वार के बाहर विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों के सांसदों ने तख्तियां लहराते हुए नारे लगाए और आरोप लगाया कि अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों में मंत्री का नाम सामने आने के बाद सरकार को जवाब देना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सियासी हलचल देखने को मिली।

इस विवाद की शुरुआत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से सांसद Rahul Gandhi के बयान से हुई। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़े एपस्टीन दस्तावेजों की जानकारी की पुष्टि की है और उनमें हरदीप सिंह पुरी के साथ उद्योगपति Anil Ambani का भी नाम दर्ज है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि दस्तावेजों में नाम मौजूद है तो अब तक कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यशैली और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए।

मंत्री का जवाब- बेबुनियाद और राजनीतिक आरोप

राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने उन्हें पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और केवल राजनीतिक माहौल गरमाने के लिए दिए गए हैं। भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पुरी ने कहा कि संसद में बिना प्रमाण के आरोप लगाना और फिर बाहर चले जाना जिम्मेदार राजनीति नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर सनसनी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर नेतृत्व की आवश्यकता होती है, न कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनका कभी जेफ्री एपस्टीन से संपर्क हुआ भी है, तो वह पूरी तरह आधिकारिक दायरे में था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 से 2017 तक वे न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत थे और उस दौरान कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में अनेक लोगों से औपचारिक मुलाकातें हुईं। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर तीन-चार मुलाकातों का उल्लेख सार्वजनिक दस्तावेजों में हो सकता है, लेकिन उनका किसी भी आपराधिक या यौन शोषण से जुड़े आरोपों से कोई संबंध नहीं है।

एपस्टीन फाइल्स को लेकर छिड़ा यह विवाद फिलहाल सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का कारण बना हुआ है। आने वाले सत्रों में यह मुद्दा संसद में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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Team The Loktantra

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