द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : दिल्ली की प्रतिष्ठित Jawaharlal Nehru University (JNU) में प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के खिलाफ कथित नारेबाजी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले पर दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि इस पूरे प्रकरण में मामला दर्ज किया जाना चाहिए और संविधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ नारेबाजी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मीडिया से बातचीत में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह नारेबाजी ‘तुगलकी मानसिकता’ का परिणाम है, जिसे देश में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जो लोग देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते हैं, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। सिरसा ने दो टूक कहा कि ऐसे कृत्य न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन करते हैं।
JNU प्रशासन ने पुलिस से की FIR की मांग
इस बीच Delhi Police ने जानकारी दी है कि JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से वसंत कुंज (नॉर्थ) थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस के अनुसार, यह शिकायत प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ नारेबाजी से जुड़ी है और फिलहाल इसे जांच के लिए विचाराधीन रखा गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि शिकायत की सामग्री का परीक्षण किया जा रहा है, जिसके बाद उचित कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
JNU प्रशासन की ओर से पुलिस को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि यह घटना सोमवार रात साबरमती हॉस्टल के बाहर हुई। यह कार्यक्रम JNU छात्र संघ यानी Jawaharlal Nehru University Students’ Union (JNUSU) से जुड़े कुछ छात्रों द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका शीर्षक था ‘ए नाइट ऑफ रेजिस्टेंस विद गुरिल्ला ढाबा’। यह कार्यक्रम 5 जनवरी 2020 को JNU में हुई हिंसा की छठी बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदला माहौल
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान लगभग 30 से 35 छात्र एकत्रित हुए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद कार्यक्रम का स्वरूप बदल गया और कुछ छात्रों ने कथित तौर पर आपत्तिजनक, भड़काऊ और उकसाने वाले नारे लगाने शुरू कर दिए। प्रशासन का कहना है कि ये नारे न केवल JNU की आचार संहिता का उल्लंघन थे, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के प्रति अवमानना की श्रेणी में भी आते हैं।
JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने वसंत कुंज (नॉर्थ) थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज करने का आग्रह किया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि इस तरह की घटनाएं कैंपस के शैक्षणिक और शांतिपूर्ण माहौल को नुकसान पहुंचाती हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और बढ़ता विवाद
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के बयान के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। उन्होंने साफ कहा कि देश में अराजकता और असंवैधानिक गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। वहीं, पुलिस की ओर से भी यह संकेत दिए गए हैं कि शिकायत की जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे।
गौरतलब है कि सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था। इसके बाद JNU कैंपस में हुए इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल, सभी की नजरें दिल्ली पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जिससे यह साफ हो सके कि JNU में हुई इस नारेबाजी के मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

