द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में श्रमिकों के आंदोलन ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए उनसे इस्तीफे की मांग कर दी है। दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि नोएडा में हुई घटनाएं किसी साजिश का हिस्सा हो सकती हैं। इसी बयान को लेकर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाते हुए सरकार की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि यह वास्तव में साजिश है, तो राज्य की खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या खुफिया तंत्र किसी और काम में व्यस्त था या पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मजदूरों के आंदोलन को नक्सलवाद से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
श्रमिकों के मुद्दे पर टकराव: सरकार बनाम विपक्ष
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने सरकार पर मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती, तो कम से कम उनके जख्मों पर नमक छिड़कने से बचना चाहिए।
अखिलेश यादव के अनुसार, बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के कारण मजदूर वर्ग पहले ही परेशान है। ऐसे में सरकार का रवैया हालात को और बिगाड़ सकता है। उन्होंने भाजपा पर “कमीशनखोरी” के जरिए महंगाई बढ़ाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने आगे कहा कि यदि राज्य सरकार स्थिति संभालने में असमर्थ है, तो मुख्यमंत्री को नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए। उनके शब्दों में, यदि सरकार खुद नहीं हटेगी तो जनता उसे हटाने का काम करेगी।
सीएम योगी का पक्ष: साजिश और औद्योगिक शांति पर जोर
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुजफ्फरनगर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि कुछ तत्व प्रदेश में औद्योगिक अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने उद्योगों और श्रमिकों से अपील की कि ऐसे प्रयासों से सतर्क रहें और प्रदेश की प्रगति में बाधा न बनने दें।
उन्होंने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार श्रमिकों और उद्योगों दोनों के साथ खड़ी है। कोविड काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने कठिन समय में भी हर वर्ग को समर्थन दिया है।

