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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सियासी घमासान: संजय राउत ने बताया ‘राष्ट्रद्रोह’, किसानों और उद्योग पर खतरे का दावा

Political storm over India-US trade deal: Sanjay Raut calls it 'treason', claims it poses a threat to farmers and industry.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। शिवसेना (उद्धव गुट) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने इस समझौते पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘राष्ट्रद्रोह’ तक करार दिया है। उनका कहना है कि यह डील भारत की संप्रभुता, आत्मसम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। राउत ने आजादी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि जिस संकल्प के साथ भारत ने 1947 में स्वतंत्रता हासिल की थी, यह समझौता उस भावना को कमजोर करता दिखाई देता है।

सरकार ने अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौते में की जल्दबाजी

राउत ने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौते को जल्दबाजी में अंतिम रूप दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते की घोषणा पहले अमेरिका की ओर से किए जाने से कई सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार, देश को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि इस डील से भारत को वास्तविक लाभ क्या मिलेगा।

टैरिफ को लेकर भी राउत ने चिंता जताई। उनका दावा है कि नए समझौते के बाद भारतीय निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क में वृद्धि होगी, जबकि भारत अमेरिकी उत्पादों पर कम या शून्य टैरिफ लागू करेगा। उन्होंने इसे असंतुलित व्यवस्था बताते हुए कहा कि इससे घरेलू उद्योग, छोटे व्यापारी और श्रमिक प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही, उन्होंने आशंका जताई कि अमेरिकी कृषि उत्पाद सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में आने लगे तो इससे स्थानीय किसानों की प्रतिस्पर्धा और मुश्किल हो जाएगी।

ऊर्जा आयात के मुद्दे पर भी राउत ने उठाए सवाल

ऊर्जा आयात के मुद्दे पर भी राउत ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि भारत को सस्ते विकल्पों की जगह महंगे स्रोतों से तेल खरीदना पड़ा, तो इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। उन्होंने अनुमान जताया कि इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ते आयात से अन्य मित्र देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ने की आशंका है।

राउत ने ‘मेक इन इंडिया’, स्टार्टअप और कौशल विकास जैसी पहलों पर भी इस समझौते के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। उनके मुताबिक यदि विदेशी उत्पादों के लिए बाजार पूरी तरह खुलता है, तो घरेलू कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को चुनौती मिल सकती है।

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Team The Loktantra

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