द लोकतंत्र/ पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) अब एक बार फिर राजनीतिक तौर पर सक्रिय होने जा रहे हैं। बुधवार, 4 फरवरी 2026 को Jan Suraaj Party ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इसकी आधिकारिक जानकारी दी। इस दौरान पार्टी नेताओं ने हाल ही में पेश किए गए बिहार बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और साथ ही प्रशांत किशोर के आगामी बिहार दौरे की रूपरेखा भी साझा की।
8 फरवरी से शुरू होगा बिहार भ्रमण
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Manoj Bharti ने बताया कि प्रशांत किशोर 8 फरवरी से बिहार के व्यापक दौरे पर निकलेंगे। इस यात्रा के दौरान वे राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर जनता से सीधे संवाद करेंगे और बजट के साथ-साथ प्रदेश की मौजूदा सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर लोगों से फीडबैक लेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा आगामी चुनावी रणनीति की तैयारी और सरकार को घेरने की कोशिश का हिस्सा भी हो सकता है, हालांकि इसका वास्तविक असर यात्रा के बाद ही स्पष्ट होगा।
बिहार बजट पर जताई ‘गहरी चिंता’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज पार्टी ने बिहार सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को लेकर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि बजट भाषण महज 11 मिनट 43 सेकंड में समाप्त हो गया, जो यह दर्शाता है कि सरकार राज्य और उसके नागरिकों के प्रति कितनी गंभीर है। इस मौके पर राष्ट्रीय प्रवक्ता Saurabh Kumar और मीडिया प्रभारी ओबैदुर रहमान भी मौजूद रहे।
सौरभ कुमार ने सवाल उठाया कि क्या बिहार जैसे बड़े राज्य के भविष्य से जुड़े बजट के लिए इतना कम समय पर्याप्त माना जा सकता है? उन्होंने आरोप लगाया कि यह रवैया राज्य सरकार और वित्त मंत्री की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है और जनहित के मुद्दों को नजरअंदाज करने का संकेत देता है।
आर्थिक आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
जन सुराज ने आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। पार्टी के अनुसार, वर्ष 2025 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय 68,624 रुपये थी, जो 2026 में केवल 20 रुपये बढ़ी है। पार्टी ने इसे ‘नगण्य वृद्धि’ बताते हुए कहा कि यह राज्य की आर्थिक चुनौतियों की वास्तविक तस्वीर सामने लाती है।
नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बजट कटौती की है, जबकि कल्याण योजनाओं पर खर्च 38 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 58,909 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पार्टी का कहना है कि यह वित्तीय प्राथमिकताओं में असंतुलन का संकेत है।
रोजगार को लेकर सरकार से जवाब तलब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज ने सरकार से यह भी पूछा कि अगले पांच वर्षों में बिहार में रोजगार सृजन किन क्षेत्रों में किया जाएगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में केंद्र सरकार का सहयोग कम हो गया, तो लगभग 12 प्रतिशत के फिस्कल डेफिसिट के साथ बिहार की अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
प्रशांत किशोर का प्रस्तावित बिहार दौरा राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। जनता से सीधा संवाद और बजट पर खुलकर सवाल उठाने की रणनीति यह संकेत देती है कि जन सुराज पार्टी आने वाले समय में खुद को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश करेगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह दौरा बिहार की राजनीति में कितना प्रभाव डालता है और क्या इससे सरकार पर दबाव बढ़ेगा।

