द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : हरियाणा विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ताज़ा आरोप ने राजनीतिक हलकों में तूफ़ान ला दिया है और इसकी गूंज सीधे ब्राज़ील तक पहुंच गई है। राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि हरियाणा की मतदाता सूची में एक ही महिला की तस्वीर 22 बार अलग-अलग नामों से इस्तेमाल की गई है। उन्होंने कहा कि यह चेहरा कभी ‘सीमा’, कभी ‘स्वीटी’, तो कभी ‘सरस्वती’ के नाम से सूची में दिखाया गया है, और यह चुनावी धांधली का सबसे बड़ा प्रमाण है।
राहुल ने इसे ‘सेंट्रलाइज्ड ऑपरेशन’ बताते हुए कहा कि हरियाणा चुनाव में बड़े पैमाने पर वोटर फर्जीवाड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि यह तस्वीर इंटरनेट पर ब्राज़ीलियन फोटोग्राफर मैथियूस फेरेरो के पेज से ली गई है और खुले स्रोत वाले फोटो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थी।
मॉडल लारिसा नेरी ने वीडियो जारी कर कहा- आखिर ये क्या पागलपन है!
इस खुलासे ने सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा दिया और देखते-ही देखते वह तस्वीर ब्राज़ील की एक मॉडल तक पहुंच गई। मॉडल लारिसा नेरी ने वीडियो जारी कर कहा कि तस्वीर उनकी है और वह उस समय करीब 18-20 साल की थीं। उन्होंने आश्चर्य और व्यंग्य भरे लहजे में कहा, दोस्तों, सुनो गॉसिप! मेरी पुरानी फोटो को भारत के चुनाव में उपयोग किया जा रहा है, और मुझे भारतीय महिला बताकर वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है? आखिर ये क्या पागलपन है!
लारिसा ने बताया कि विवाद सामने आते ही भारतीय पत्रकारों के कॉल आने लगे। एक रिपोर्टर ने तो उस सैलून में फोन कर दिया जहां वह काम करती हैं और फिर उनके इंस्टाग्राम पर भी लगातार संपर्क करने की कोशिश की। लारिसा ने कहा कि एक दोस्त ने उन्हें दूसरे शहर से वह तस्वीर भेजी और तभी उन्हें पता चला कि उनकी तस्वीर भारत के चुनावी विवाद में फंस गई है।
मतदाता सूची में मॉडल की फोटो के पीछे की सच्चाई क्या?
जानकारी के अनुसार, लारिसा की यह तस्वीर एक फैशन शूट का हिस्सा थी जिसे बाद में फ्री-यूज़ वेबसाइट पर अपलोड किया गया था। अब यही फोटो कथित रूप से हरियाणा की मतदाता सूची में सामने आई है, जिससे भारत की वोटर डेटा सुरक्षा और पहचान सत्यापन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राहुल गांधी के इस दावे के बाद सियासी गर्मी और बढ़ गई है। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की निष्पक्षता पर हमला बताया है, जबकि बीजेपी इन आरोपों को राजनीतिक नाटक करार दे रही है। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर तीखी बहस जारी है, कुछ लोग इसे चुनावी फर्जीवाड़े का सबूत मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सचमुच वोटर लिस्ट में विदेशी मॉडल की तस्वीर इस्तेमाल की गई? और यदि ऐसा हुआ है, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि चुनावी प्रणाली में बड़ी सेंध का संकेत है। यह मामला सिर्फ एक चेहरे का नहीं, लोकतंत्र की विश्वसनीयता की परीक्षा है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और जांच इस विवाद की दिशा तय करेगी। फिलहाल इतना तय है कि हरियाणा में उठी यह तस्वीर वाली कहानी अब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है और भारत के चुनावी डेटा मॉडल और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर चुकी है।

