द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : केंद्रीय Budget 2026 पर विपक्षी दलों की ओर से सवालों और आलोचनाओं का सिलसिला तेज हो गया है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बजट पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि बजट भाषण में डिटेल्स बेहद कम थीं और सिर्फ 3-4 हेडलाइन तक सीमित रहा। उन्होंने खास तौर पर आयुर्वेद और केरल की अनदेखी को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
‘केरल का जिक्र नहीं किया गया’- शशि थरूर
शशि थरूर ने कहा कि बजट में एम्स आयुर्वेद की घोषणा तो की गई, लेकिन यह नहीं बताया गया कि यह कहां स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि केरल में आयुर्वेद की लंबी और समृद्ध परंपरा रही है, ऐसे में वहां इसकी सख्त जरूरत है। बावजूद इसके, वित्त मंत्री के भाषण में केरल का नाम तक नहीं लिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि बजट में नारियल का जिक्र किया गया, जो स्वाभाविक तौर पर केरल से जुड़ा विषय है क्योंकि देश में सबसे अधिक नारियल उत्पादन वहीं होता है। लेकिन भाषण में वाराणसी और पटना जैसे शहरों का नाम लिया गया, जबकि केरल पूरी तरह गायब रहा। थरूर ने तंज कसते हुए कहा कि संभव है कि विस्तृत दस्तावेजों में जानकारी हो, लेकिन भाषण में ठोस घोषणाओं का अभाव निराशाजनक है।
‘वादे बहुत, अमल नहीं’
शशि थरूर ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यही इस सरकार की सबसे बड़ी समस्या है घोषणाएं और वादे बहुत किए जाते हैं, लेकिन इंप्लीमेंटेशन के स्तर पर नतीजे नजर नहीं आते। उनके मुताबिक, बजट भाषण में दिशा कम और अस्पष्टता ज्यादा दिखाई दी।
अखिलेश यादव का हमला: ‘गरीबों की समझ से बाहर बजट’
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट 2026 को जमीनी हकीकत से कटा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट आम गरीब की समझ से बाहर है। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि शिक्षा के बिना विकसित भारत कैसे बनेगा, जब बजट में शिक्षा और सामाजिक सरोकारों पर ठोस फोकस नजर नहीं आता।
कांग्रेस का सतर्क रुख
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने बजट पर संतुलित लेकिन सतर्क प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि क्या भारत को वास्तव में विकसित देशों जैसा बजट मिला है। औजला के अनुसार, देश को समान और संतुलित बजट की जरूरत है, जिससे हर वर्ग और हर राज्य को बराबर लाभ मिल सके।
टीएमसी ने बताया निराशाजनक
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद सौगत रॉय ने बजट को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री ने पुरानी योजनाओं को ही दोहराया है। साथ ही यह भी कहा कि किसी भी राज्य को विशेष लाभ नहीं मिला और खासकर पश्चिम बंगाल को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
कुल मिलाकर, बजट 2026 पर विपक्ष की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में राज्यों की अनदेखी, शिक्षा, रोजगार और क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी और तेज होगी।

