द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Middle East में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz बंद होने के बीच भारत के लिए राहत की खबर है। RBI के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को एक सकारात्मक संकेत मिला है। Reserve Bank of India द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.49 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब Israel-Iran Conflict के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। हाल ही में इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ा है। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कतर और कुवैत जैसे देशों को निशाना बनाया और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को बंद करने का फैसला किया।
इस मार्ग से दुनिया के कई देशों को खाड़ी क्षेत्र से कच्चा तेल मिलता है, इसलिए इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है। हालांकि इस अस्थिर माहौल के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी को आर्थिक स्थिरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विदेशी मुद्रा भंडार में 4.88 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
आरबीआई के अनुसार 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.88 अरब डॉलर बढ़कर 728.49 अरब डॉलर हो गया। इससे पहले वाले सप्ताह में यह 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.60 अरब डॉलर रह गया था। विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Currency Assets) भी इस अवधि में बढ़ी हैं। ये परिसंपत्तियां 56.1 करोड़ डॉलर की वृद्धि के साथ 573.12 अरब डॉलर तक पहुंच गईं।
इन परिसंपत्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और जापानी येन जैसी प्रमुख मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां भी शामिल होती हैं, जिनके मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव कुल भंडार पर पड़ता है।
स्वर्ण भंडार और SDR में भी बढ़ोतरी
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार भारत के स्वर्ण भंडार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। समीक्षा सप्ताह के दौरान गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.14 अरब डॉलर बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया। इसके अलावा स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) भी 2.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.87 अरब डॉलर तक पहुंच गए। वहीं International Monetary Fund (IMF) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 15.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.87 अरब डॉलर हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में यह वृद्धि भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश को वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगी।

