द लोकतंत्र/ पटना : बिहार के रोहतास जिले में रोपवे हादसे के बाद सियासत गर्म हो गई है। शुक्रवार (26 दिसंबर) को ट्रायल रन के दौरान नवनिर्मित रोपवे का एक टावर अचानक ढह गया, जिससे चार ट्रॉलियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं। गनीमत यह रही कि घटना के समय ट्रॉलियों में कोई सवार नहीं था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। इस हादसे के बाद RJD ने नीतीश सरकार पर सीधा हमला बोला है और परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। जांच के बाद ही रोपवे को आम जनता के लिए खोला जाएगा, फिलहाल संचालन रोक दिया गया है।
भाजपा-नीतीश सरकार की कमीशनखोरी की भेंट चढ़ा एक और प्रोजेक्ट…
घटना के बाद सबसे तेज प्रतिक्रिया राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से आई। पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट कर लिखा गया कि भाजपा-नीतीश सरकार की कमीशनखोरी की भेंट चढ़ा एक और प्रोजेक्ट… ट्रायल रन में ही करोड़ों स्वाहा हो गए। राजद ने यह भी कहा कि यदि हादसा आम संचालन के समय होता तो सैकड़ों जानें जोखिम में पड़ सकती थीं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार निर्माण कार्यों में गुणवत्ता पर ध्यान देने की बजाय कमीशनबाजी में लगी हुई है, जिसका यह परिणाम है।
जांच टीम गठित, ट्रायल पास होने के बाद ही शुरू होगा संचालन
वहीं प्रशासन का कहना है कि हादसे की तकनीकी जांच जारी है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अभियंता खुर्शीद करीम ने बताया कि कोलकाता से विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है, जो संरचना, केबल, टॉवर और ट्रॉली सिस्टम की जांच करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी परीक्षण सफल होने और सुरक्षा स्तर सुनिश्चित होने के बाद ही रोपवे को चालू किया जाएगा। अधिकारी मानते हैं कि फिलहाल प्राथमिकता जांच और पुनर्सुधार है, ताकि भविष्य में कोई जोखिम न रहे।
इस रोपवे के जरिए रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम को जोड़ा जाना था और इसे 1 जनवरी से आम जनता के लिए शुरू करने की योजना थी। लेकिन ट्रायल में ही ढहने की घटना ने पूरे प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निर्माण गुणवत्ता, निगरानी तंत्र और सरकारी परियोजनाओं की पारदर्शिता पर बहस को हवा दे रहा है। अब बिहार की राजनीति में यह मुद्दा एक और विवाद का केंद्र बन चुका है, जिसका असर आने वाले समय में सरकार और विपक्ष की तकरार में साफ दिख सकता है।

