द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : बैंकॉक से दिल्ली आ रही एयर इंडिया (Air India) की अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सामने आया एक विवाद अब सोशल मीडिया से निकलकर यात्री अधिकारों की बहस के केंद्र में आ गया है। खाने जैसी बुनियादी सुविधा को लेकर हुए इस मामले ने न सिर्फ एयरलाइन की सर्विस क्वालिटी पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि शिकायत करने वाले यात्रियों के साथ किस तरह का रवैया अपनाया जा रहा है।
पहले से बुक मील मांगना पड़ा भारी
यात्री अभिषेक चौधरी का आरोप है कि उन्होंने टिकट बुक करते समय अपने लिए वेज और अपने 22 वर्षीय कजिन के लिए नॉन-वेज मील पहले से सिलेक्ट किया था। बावजूद इसके, फ्लाइट में उनके कजिन को नॉन-वेज खाना देने से इनकार कर दिया गया। जब उन्होंने ई-मेल और बुकिंग डिटेल दिखाकर अपनी बात रखी, तो केबिन क्रू ने गलती मानने के बजाय उल्टा उन पर ही खाना लौटाने का आरोप लगा दिया। यात्रियों का कहना है कि यह सिर्फ एक सर्विस लैप्स नहीं, बल्कि साफ तौर पर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश थी।
विदेशी यात्री ने भी उठाई आवाज
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब बगल में बैठे एक फ्रांसीसी यात्री ने भी स्टाफ के व्यवहार को अपमानजनक बताया। वायरल वीडियो में वह यात्री कहता नजर आता है कि जब उसने अपना नॉन-वेज मील मांगा तो उससे सख्त और रूखे लहजे में बात की गई, टिकट दिखाने को कहा गया और ऐसा महसूस कराया गया जैसे वह कोई इंसान नहीं बल्कि “कुत्ता” हो। यह टिप्पणी एयर इंडिया की इंटरनेशनल इमेज पर सीधा सवाल खड़ा करती है।
यात्री अभिषेक चौधरी के अनुसार, जब उन्होंने इस पूरे व्यवहार की शिकायत दर्ज कराने की बात कही, तो केबिन क्रू ने उनसे बातचीत ही बंद कर दी। कुछ ही देर बाद पायलट की ओर से उन्हें एक चेतावनी पत्र थमा दिया गया। इस पत्र में कहा गया कि उनके व्यवहार से फ्लाइट का माहौल खराब हो रहा है। आरोप है कि पूरे सफर के दौरान न तो कजिन को खाना मिला और न ही यात्रियों से सम्मानजनक तरीके से बात की गई। सवाल यह है कि क्या शिकायत करना अब ‘अनुशासनहीनता’ की श्रेणी में आ गया है?
वायरल वीडियो ने खोली पोल
यात्री द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखता है कि मामला सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों की बात सुने बिना उन्हें चुप कराने और डराने की कोशिश की गई। यह वीडियो एयर इंडिया के “टाटा ग्रुप के बाद बदली हुई सर्विस” वाले दावों को भी कटघरे में खड़ा करता है।
एयर इंडिया ने बयान जारी कर कहा है कि वह वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी या वास्तव में जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी?
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि भारतीय एयरलाइंस में यात्री अधिकारों की स्थिति कितनी कमजोर है। भोजन जैसी बुनियादी सुविधा पर सवाल उठाने पर चेतावनी पत्र थमा देना, एक खतरनाक मिसाल है। अगर यही रवैया रहा, तो भरोसा सिर्फ एयर इंडिया पर नहीं, पूरी भारतीय एविएशन सर्विस पर कमजोर पड़ेगा।

