द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने साउदर्न रेलवे पर गंभीर आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। विजयन का दावा है कि एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह में स्कूली बच्चों से RSS का ‘गण गीत’ गवाया गया। उन्होंने इसे सरकारी संस्थानों की धर्मनिरपेक्ष छवि पर हमला बताते हुए कहा कि यह क़दम पूर्णतः अस्वीकार्य है और सार्वजनिक प्लेटफॉर्म को ‘संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे’ का माध्यम बनाने का प्रयास है। विजयन के अनुसार, किसी भी सरकारी कार्यक्रम में धार्मिक या विचारधारा-आधारित प्रचार की जगह नहीं होनी चाहिए, और यह घटना संविधान व लोकतंत्र के मूल मूल्यों के खिलाफ है।
बच्चों के माध्यम से विचारधारा को बढ़ावा देना सार्वजनिक संस्थाओं के साथ अन्याय
पिनराई विजयन ने अपने बयान में कहा कि वंदे भारत उद्घाटन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में RSS से जुड़ा गीत शामिल करना प्रशासनिक तटस्थता पर प्रश्न उठाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों के माध्यम से विचारधारा को बढ़ावा देना सार्वजनिक संस्थाओं के साथ अन्याय है।
उनके मुताबिक, इस तरह की गतिविधियाँ न केवल सरकारी आयोजनों की सेक्युलर मर्यादा को तोड़ती हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित करती हैं। विजयन ने आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले सबसे बड़े सार्वजनिक उपक्रम भारतीय रेलवे को “सांप्रदायिक प्रचार का मंच” बनाया जा रहा है, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंता का विषय है।
भारत की विविधता और संवैधानिक संरचना धार्मिक निरपेक्षता पर आधारित
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साउदर्न रेलवे ने वीडियो को सोशल मीडिया पर देशभक्ति गीत के रूप में प्रस्तुत किया, जो स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों और इतिहास के साथ खिलवाड़ जैसा है। विजयन ने कहा कि भारत की विविधता और संवैधानिक संरचना धार्मिक निरपेक्षता पर आधारित है, और ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करना बेहद ज़रूरी है ताकि सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता बनी रहे।
इस विवाद पर राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिट्टस ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कार्यक्रम का वीडियो साझा किया और रेलवे पर “नए निचले स्तर पर पहुँचने” का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकारी कार्यक्रमों में राजनीतिक रंग घुलता जा रहा है और निर्वाचित प्रतिनिधियों को पीछे रखा जा रहा है, जो लोकतांत्रिक परंपरा के विरुद्ध है। ब्रिट्टस ने यह भी दावा किया कि यह कदम सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करता है और सरकारी संस्थाओं के राजनीतिक दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब विजयन पहले भी RSS और केंद्र सरकार पर निशाना साध चुके हैं। हाल ही में उन्होंने RSS की तुलना इज़राइल के जियोनिस्ट समूहों से की थी और RSS की शताब्दी पर स्मारक टिकट और सिक्का जारी करने के फैसले पर आपत्ति जताई थी। इस नए विवाद ने एक बार फिर केंद्र और वाम सरकार के बीच वैचारिक टकराव को चर्चाओं के केंद्र में ला दिया है।

