द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz की स्थिति बेहद जटिल हो गई है। हालात ऐसे हैं कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग न पूरी तरह खुला है और न ही पूरी तरह बंद। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, ऐसे में यहां की अनिश्चितता का असर पूरी दुनिया, खासकर भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर साफ दिखाई दे रहा है।
28 फरवरी को अमेरिकी कार्रवाई के बाद से ही यह मार्ग अस्थिर बना हुआ है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर होर्मुज किसके लिए खुला है और किसके लिए बंद। यही असमंजस वैश्विक शिपिंग कंपनियों और तेल बाजार में चिंता का कारण बन गया है।
अमेरिका-ईरान टकराव: अलग-अलग दावे, बढ़ता तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने के बाद हालात और बिगड़ गए। डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज में तैनात होकर जहाजों की आवाजाही नियंत्रित करेगी। उनका दावा था कि इस मार्ग से कोई भी जहाज आसानी से नहीं गुजर पाएगा।
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को सीमित बताते हुए कहा कि कार्रवाई केवल उन जहाजों पर केंद्रित होगी जो ईरान से तेल ले जा रहे हैं या वहां जा रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान की तेल आय को रोकना है, न कि पूरी तरह मार्ग बंद करना।
दूसरी ओर, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह इस मार्ग को अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए सीमित कर सकता है, जबकि अन्य देशों को टोल के जरिए सुरक्षित रास्ता दिया जा सकता है। ईरान की सैन्य इकाइयों ने चेतावनी दी है कि किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा।
भारत पर असर: बढ़ सकती है LPG और तेल की किल्लत
इस टकराव का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं। शुरुआती दौर में भारत ने कूटनीति और संतुलन के जरिए कुछ आपूर्ति सुनिश्चित कर ली थी, लेकिन मौजूदा हालात में जोखिम बढ़ गया है।
यदि अमेरिकी और ईरानी नौसेनाएं आमने-सामने आती हैं, तो शिपिंग कंपनियां इस मार्ग से गुजरने से बच सकती हैं। इससे एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। नतीजतन, भारत में गैस की कमी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर महंगाई पर भी पड़ेगा, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा बोझ बढ़ेगा।

