द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान सरकार की नीति और कार्रवाई को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एक समय देश का बड़ा हिस्सा ‘रेड कॉरिडोर’ के नाम से जाना जाता था, जहां नक्सलवाद का गहरा प्रभाव था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है और अब बस्तर जैसे क्षेत्रों में नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है।
शाह ने बताया कि सरकार ने इन इलाकों में विकास को प्राथमिकता देते हुए हर गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया। स्कूल, राशन की दुकान, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से लोगों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास इसलिए नहीं पहुंच सका क्योंकि वहां भय और हिंसा का माहौल था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
नक्सलवाद पर सरकार का सख्त रुख
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जो भी हथियार उठाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शाह के अनुसार, नक्सलवाद केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि एक वैचारिक चुनौती है, जिसे खत्म करने के लिए सुरक्षा और विकास दोनों जरूरी हैं।
उन्होंने नक्सल आंदोलन के इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि यह 1960 के दशक के अंत में शुरू हुआ और धीरे-धीरे कई राज्यों में फैल गया। उनका कहना था कि इस विचारधारा ने भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह किया और लंबे समय तक उन्हें मुख्यधारा से दूर रखा।
विपक्ष और ‘अर्बन नक्सल’ पर निशाना
अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि दशकों तक शासन करने के बाद भी ये क्षेत्र पिछड़े क्यों रहे।
इसके साथ ही उन्होंने तथाकथित ‘अर्बन नक्सल’ पर भी हमला बोला। शाह ने कहा कि कुछ लोग केवल नक्सलियों के पक्ष में लिखते हैं, लेकिन हिंसा के शिकार निर्दोष नागरिकों और शहीद जवानों के बारे में चुप रहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में बदलाव का रास्ता संविधान के दायरे में होना चाहिए, न कि हिंसा के जरिए।
अंत में उन्होंने दोहराया कि सरकार सभी के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है और देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

