द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (India-EU Trade Deal) को लेकर अमेरिका की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने इस डील पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यूरोपीय यूनियन ने यूक्रेन के समर्थन से ज्यादा अपने व्यापारिक हितों को तरजीह दी है। उन्होंने इसे यूरोप के दोहरे रवैये का उदाहरण बताया।
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर अमेरिकी नाराजगी
CNBC को दिए इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत और EU के बीच कई वर्षों की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है, जिससे वह व्यक्तिगत रूप से निराश हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen द्वारा इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहे जाने पर भी उन्होंने तंज कसा। बेसेंट ने कहा कि यूरोप को अपने फैसले लेने का अधिकार है, लेकिन यह रवैया यूक्रेन को लेकर दिए गए उसके बयानों को कमजोर करता है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत से ऐसे रिफाइंड उत्पाद खरीद रहे हैं, जो रूसी तेल से तैयार किए गए हैं। इसके बावजूद यूरोपीय यूनियन ने भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए सख्त टैरिफ का समर्थन नहीं किया। बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका ने पिछले साल भारतीय उत्पादों पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, लेकिन EU इस कदम के साथ नहीं आया क्योंकि वह भारत के साथ अपना व्यापार समझौता पक्का करना चाहता था।
बेसेंट ने कहा कि यूरोप की यह नीति उसके यूक्रेन को लेकर किए गए दावों पर सवाल खड़े करती है। उनके शब्दों में, जब भी कोई यूरोपीय नेता यूक्रेनी जनता के समर्थन की बात करे, तो यह याद रखना चाहिए कि व्यापारिक हितों को उन्होंने प्राथमिकता दी है।
India-EU Deal का बड़ा उद्देश्य
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते का मकसद द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाई देना और यूरोप की अमेरिका पर निर्भरता को कम करना बताया जा रहा है। ब्रसेल्स के अनुसार, इस डील के तहत करीब 97 प्रतिशत वस्तुओं पर टैरिफ या तो पूरी तरह खत्म होंगे या काफी कम किए जाएंगे। इससे 2032 तक EU का भारत को निर्यात दोगुना होने की संभावना है और यूरोपीय कंपनियों को अरबों यूरो की ड्यूटी में राहत मिल सकती है।
अमेरिका-यूरोप रिश्तों में बढ़ता तनाव
ये बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं। राष्ट्रपति Donald Trump के दूसरे कार्यकाल में वॉशिंगटन और ब्रसेल्स के बीच टैरिफ और समझौतों को लेकर मतभेद गहराए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि EU ने जुलाई में हुए फ्रेमवर्क समझौते के तहत किए गए टैरिफ कटौती के वादों को अब तक लागू नहीं किया।
स्कॉट बेसेंट ने ऊर्जा व्यापार को लेकर भी यूरोप पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया, लेकिन इसके बावजूद यूरोप ने भारत के साथ बड़ा व्यापार समझौता कर लिया। इससे अमेरिका-भारत और अमेरिका-यूरोप संबंधों में नई खटास देखने को मिल रही है।
भारत पर टैरिफ में राहत के संकेत
फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाए हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा रूसी तेल से जुड़े मुद्दों से जुड़ा है। हालांकि, बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में इन टैरिफ में राहत की संभावना बन सकती है, क्योंकि भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में हाल के महीनों में गिरावट देखी गई है।
कुल मिलाकर, India-EU Trade Deal ने जहां भारत और यूरोप के रिश्तों को नई मजबूती दी है, वहीं अमेरिका-यूरोप व्यापार संबंधों में तनाव को और गहरा कर दिया है।

