द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : कांग्रेस स्थापना दिवस समारोह के बाद पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में चाय-नाश्ते के दौरान हुई अनौपचारिक बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में गर्मी बढ़ा दी। कार्यक्रम ख़त्म होने के बाद जब वरिष्ठ नेता आपस में चर्चा कर रहे थे, उसी बीच राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह आमने-सामने आए। यह वही समय था जब दिग्विजय सिंह द्वारा RSS और BJP के संगठनात्मक ढांचे को सीखने योग्य बताने वाली पोस्ट पर देशभर में बहस चल रही थी।
इसी माहौल में राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए दिग्विजय सिंह से हाथ मिलाया और हल्के व्यंग्य के साथ कहा, आपने तो कल अच्छा काम कर दिया। यह सुन पीछे खड़े एक सांसद ने फौरन चुटकी ली, दिग्विजय सिंह साहब बदमाशी कर गए। राहुल गांधी भी हँसते हुए बोले, हाँ बिल्कुल, बदमाशी कर गए।
सभी मुद्दों को पहले पार्टी के आंतरिक मंचों पर रखना चाहिए
हल्के-फुल्के अंदाज़ में हुई बातचीत के बाद राहुल ने हँसते हुए सलाह भी दे डाली। सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी ने कहा कि जो भी मुद्दा हो, उसे पहले पार्टी के आंतरिक मंचों पर रखना चाहिए, सोशल मीडिया पर लिखकर हल नहीं निकलता। सोनिया गांधी सहित कई वरिष्ठ नेता भी इस दौरान मौजूद रहे और पूरा माहौल सहज एवं हास्यपूर्ण रहा।
पूरा विवाद दिग्विजय सिंह की उस पोस्ट से शुरू हुआ था जिसमें उन्होंने 1990 के दशक की वह फोटो शेयर की, जिसमें युवा नरेंद्र मोदी, एल.के. आडवाणी के पास फर्श पर बैठे दिख रहे थे। पोस्ट में दिग्विजय ने लिखा था कि एक जमीनी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक पहुँच सकता है यही संगठन की शक्ति है। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुई और कई नेताओं ने इसे RSS और BJP मॉडल की तारीफ के रूप में देखा, जबकि पार्टी के भीतर भी प्रतिक्रिया दो धड़ों में बँटी।
RSS का समर्थन नहीं, संगठन की ताकत की बात
विवाद बढ़ने पर दिग्विजय सिंह ने सफाई देते हुए कहा, मैं संगठन की बात कर रहा था, RSS की नहीं। मैं RSS और मोदी का कट्टर विरोधी था, हूँ और रहूँगा। संगठन की तारीफ करना गलत कैसे हो सकता है? उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका मकसद कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और उसकी क्षमता पर ध्यान दिलाना था।
यानी, कांग्रेस स्थापना दिवस पर हुई यह मुलाकात भले ही मज़ाक में बीती हो, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश साफ दिखता है। संगठन की मजबूती कांग्रेस की प्राथमिकता है, पर सोशल मीडिया बयानबाज़ी पार्टी लाइन के भीतर रहे तो बेहतर।

