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ट्रंप ने युद्ध नहीं रुकवाया, हमने खुद सीजफायर मांगा, इशाक डार के कबूलनामे से पाकिस्तान बेनकाब!

Trump did not stop the war; we ourselves requested the ceasefire. Ishaq Dar's confession exposes Pakistan!

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर पहली बार पाकिस्तान की ओर से ऐसा बयान सामने आया है, जिसने पूरी कहानी का रुख ही बदल दिया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि उनकी मध्यस्थता के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध टला था। लेकिन अब पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के ताजा बयान ने खुद उनके दावे को गलत साबित कर दिया है।

डार ने एक प्रेस वार्ता में साफ कहा कि पाकिस्तान ने कभी किसी देश से मध्यस्थता की मांग नहीं की, न ही अमेरिका से। उनका यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के लगभग सात महीने बाद आया है, जब पाकिस्तान को संघर्ष में भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

पाकिस्तान को खुद सीजफायर की पहल करनी पड़ी

डॉन अखबार के मुताबिक इशाक डार ने माना कि भारत की जवाबी कार्रवाई इतने प्रभावी स्तर पर हुई कि पाकिस्तान को खुद सीजफायर की पहल करनी पड़ी। उन्होंने कहा- हमने किसी से मध्यस्थता नहीं मांगी। संघर्ष बढ़ा तो हमने ही बातचीत और युद्धविराम की दिशा पकड़ी। उनके इस बयान ने ट्रंप के वर्षों से किए जा रहे उस बयान को पूरी तरह चुनौती दे दी, जिसमें वे खुद को सीजफायर का नायक बताते रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले भी डार कई बार मतभेदभरे बयान दे चुके हैं। अगस्त और सितंबर में उन्होंने स्वीकार किया था कि भारत ने तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी के प्रस्ताव को हमेशा ठुकराया और संघर्ष को द्विपक्षीय मुद्दा बताया।

इशाक डार ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने भी स्पष्ट रूप से बता दिया था कि भारत किसी मध्यस्थता के पक्ष में नहीं है। हालांकि उन्होंने विरोधाभासी तरीके से यह भी कहा कि एक कॉल के दौरान रुबियो ने उन्हें बताया था कि भारत सीजफायर को तैयार है और पूछा गया कि क्या पाकिस्तान भी सहमत है। उनके इस उलझे हुए बयान ने पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को भारी सैन्य नुकसान झेलना पड़ा था

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को भारी सैन्य नुकसान झेलना पड़ा था। भारतीय मिसाइल स्ट्राइक में पाकिस्तान के कई रणनीतिक ठिकाने जैसे नूर खान, रहीम यार खान, भोलारी, सरगोधा और मुरीदके एयरबेस बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इसके अलावा पाकिस्तानी वायुसेना का AEW&C इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम भी ढेर कर दिया गया था। हालात बिगड़ते देख इस्लामाबाद ने पीछे हटना ही समझदारी समझी।

कुल मिलाकर इशाक डार का बयान पाकिस्तान की रणनीतिक कमजोरी और वास्तविक स्थिति को उजागर करता है। यह साफ हो गया है कि न तो भारत ने युद्ध रोकने के लिए किसी तीसरे देश को बुलाया था और न ही अमेरिका ने वह भूमिका निभाई जिसका श्रेय ट्रंप लेते रहे। सीजफायर पाकिस्तान की मजबूरी थी, ट्रंप का दखल नहीं। यह बयान भारत की कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करता है और पाकिस्तानी दावों की पोल भी खोलता है।

Team The Loktantra

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