द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका फिलहाल इस क्षेत्र में अपने सैनिक तैनात करने का इरादा नहीं रखता। व्हाइट हाउस में जापान की प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि वह किसी भी स्थिति में अपने सैन्य कदमों का खुलासा पहले से नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका अपनी रणनीतिक कार्रवाई जारी रखेगा।
ट्रंप ने कहा कि मौजूदा सैन्य अभियान का उद्देश्य केवल तत्काल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि दीर्घकालिक वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने ईरान को क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि दुनिया के अधिकांश देश इस आकलन से सहमत हैं।
‘दुनिया की सबसे ताकतवर सेना’, अमेरिका ने दिखाई ताकत
अपने बयान में ट्रंप ने अमेरिकी सेना की ताकत और तकनीकी क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में एक हमले के दौरान 100 से अधिक रॉकेट्स को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया, जो अमेरिका की अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली की क्षमता को दर्शाता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना और बेहतरीन सैन्य उपकरण हैं, जो किसी भी खतरे का सामना करने में सक्षम हैं।
मिडिल ईस्ट में यह संघर्ष उस समय और तेज हो गया जब अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमले करते हुए खाड़ी क्षेत्र और इजरायल में कई ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों पर असर पड़ा। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
ट्रंप के बयान से यह साफ है कि अमेरिका बिना जमीनी सेना उतारे भी इस संघर्ष में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है। हालांकि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

