द लोकतंत्र : भारत सरकार ने आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 के निर्माण में समावेशी दृष्टिकोण अपनाते हुए देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी राय साझा करने के लिए आमंत्रित किया है। वित्त मंत्रालय का मानना है कि एक प्रगतिशील अर्थव्यवस्था का आधार तभी मजबूत होगा जब नीतियों में आम जनता की आवाज प्रतिध्वनित होगी। इस पहल के तहत, नागरिक सीधे सरकार को बता सकते हैं कि महंगाई, कर प्रणाली, रोजगार और बुनियादी ढांचे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उन्हें क्या अपेक्षाएं हैं।
डिजिटल लोकतंत्र: MyGov प्लेटफॉर्म बना सेतु
सरकार ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए जनता से संवाद स्थापित किया है।
सुझाव दर्ज करने की प्रक्रिया:
- लॉग-इन प्रक्रिया: इच्छुक नागरिक MyGov.in पोर्टल अथवा ऐप पर जाकर अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के जरिए पहुंच बना सकते हैं।
- विषय-वार कमेंट: पोर्टल पर विभिन्न श्रेणियां जैसे कृषि, MSME, शिक्षा, और स्वास्थ्य निर्धारित की गई हैं। उपयोगकर्ता इनमें अपनी विशिष्ट मांगें लिख सकते हैं।
- सीधा संवाद: ये सुझाव सीधे वित्त मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के पास समीक्षा के लिए भेजे जाएंगे, जिससे बजट को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके।
परामर्श का दौर: विशेषज्ञों से हितधारकों तक
बजट पूर्व परामर्श (Pre-Budget Consultation) की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण निरंतर अर्थशास्त्रियों, उद्योग मंडलों (CII, FICCI), किसान संगठनों और श्रमिक संघों के साथ बैठकें कर रही हैं। जनता से सुझाव मांगने का यह कदम उस परामर्श श्रृंखला का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करता है।
लक्ष्य: 1 फरवरी को प्रस्तुत होगा विकास का रोडमैप
परंपरा के अनुसार, 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट भाषण दिया जाएगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार बजट का मुख्य केंद्र ‘मिडिल क्लास’ को टैक्स में राहत देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करना होगा। जनता द्वारा दिए गए सुझाव अक्सर नई योजनाओं के नामकरण अथवा मौजूदा योजनाओं में संशोधन का आधार बनते हैं।
भविष्य का प्रभाव
- बजट प्रक्रिया में आम नागरिक को जोड़ना डिजिटल गवर्नेंस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह न केवल पारदर्शिता बढ़ाता है, बल्कि नागरिकों में यह विश्वास भी पैदा करता है कि देश के आर्थिक भविष्य के निर्धारण में उनका भी योगदान है।
निष्कर्षतः, बजट 2026-27 केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होने वाला है।

