द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा की सालाना फीस 1 लाख डॉलर तक बढ़ाने के ऐलान के बाद भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कंपनियों में हड़कंप मच गया था। कई बड़ी टेक कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को तुरंत अमेरिका लौटने की सलाह तक दे दी थी। लेकिन अब एक अमेरिकी अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारतीयों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
मौजूदा वीजा धारकों पर लागू नहीं होगा नियम
अमेरिकी अधिकारी ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि H-1B वीजा पर रह रहे भारतीयों को रविवार तक अमेरिका लौटने की कोई आवश्यकता नहीं है और न ही उन्हें देश में रहने के लिए 1 लाख डॉलर का भुगतान करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन का यह नया नियम केवल नए वीजा आवेदन पर लागू होगा। जिन लोगों के पास पहले से H-1B वीजा है या जो उसका रिन्यूवल करवा रहे हैं, उन पर नई फीस का प्रावधान नहीं होगा।
भारतीय पेशेवरों पर असर की आशंका
H-1B वीजा धारकों में लगभग 70% भारतीय हैं, इसलिए ट्रंप सरकार की इस घोषणा से सबसे अधिक प्रभाव भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर पड़ने की आशंका थी। यही कारण था कि माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और जेपी मॉर्गन जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को तुरंत अलर्ट किया और उन्हें अमेरिका लौटने या अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचने की सलाह दी थी।
टेक कंपनियों की चिंता को मिली राहत
माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और जेपी मॉर्गन जैसी दिग्गज कंपनियों ने वीजा फीस हाइक की खबरों के बाद अपने कर्मचारियों को चेतावनी दी थी कि वे अमेरिका के बाहर ज्यादा समय न बिताएं। फिलहाल H-1B वीजा फीस 2,000 से 5,000 डॉलर के बीच होती है, लेकिन नई नीति लागू होने पर यह सालाना 1 लाख डॉलर तक पहुंच सकती थी। अब अमेरिकी अधिकारी की सफाई के बाद भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों को राहत मिली है।
भारतीय आईटी सेक्टर के लिए राहत की खबर
अमेरिकी सरकार के इस बयान से भारतीय आईटी कंपनियों ने राहत की सांस ली है। उद्योग जगत का मानना है कि H-1B वीजा पर अत्यधिक शुल्क लागू होने से न केवल भारतीय पेशेवरों पर वित्तीय बोझ बढ़ता, बल्कि अमेरिकी कंपनियों की परियोजनाओं पर भी असर पड़ता। नई स्पष्टीकरण से यह साफ हो गया है कि मौजूदा वीजा धारक और उनका रिन्यूवल कराने वाले लोग फिलहाल इस शुल्क से मुक्त रहेंगे।

