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Aditi Govitrikar Interview: मिसेज वर्ल्ड अदिति गोवित्रिकर का छलका दर्द, बचपन में पिता के दोस्त ने की थी गंदी हरकत

The loktnatra

द लोकतंत्र : साल 2001 में ‘मिसेज वर्ल्ड’ का खिताब जीतकर भारत का नाम रोशन करने वाली अभिनेत्री अदिति गोवित्रिकर आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने ‘सोच’, ’16 दिसंबर’ और ‘भेजा फ्राई’ जैसी फिल्मों से अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। लेकिन ग्लैमर की इस दुनिया के पीछे अदिति ने जो दर्द झेला है, उसे सुनकर हर कोई हैरान है। हाल ही में एक इंटरव्यू में अदिति ने अपने बचपन के उन जख्मों को कुरेदा है, जो आज भी उन्हें तकलीफ देते हैं।

बचपन की वो खौफनाक यादें

हॉटरफ्लाई को दिए एक इंटरव्यू में अदिति गोवित्रिकर ने बताया कि जब वे महज छह या सात साल की थीं, तब उनके पिता के एक दोस्त ने ही उनके साथ बेहद शर्मनाक और घटिया हरकत की थी। अदिति ने कहा, “ईमानदारी से कहूँ तो मुझे पनवेल में बहुत बुरे अनुभवों का सामना करना पड़ा। उन घटनाओं को समझने में मुझे सालों लग गए। जब आप इतने छोटे होते हैं, तो पूरी तरह समझ नहीं पाते कि क्या हुआ, लेकिन वो अहसास भयानक होता है कि आपके साथ कुछ गलत हुआ है।”

बस के सफर में बैग बनता था ‘हथियार’

अदिति ने अपनी किशोरावस्था के संघर्षों को भी साझा किया। जब वे पढ़ाई के लिए पनवेल से मुंबई (दादर) बस से सफर करती थीं, तो छेड़छाड़ से बचने के लिए उन्हें अनोखे तरीके अपनाने पड़ते थे।

अदिति ने बताया, “मैं बस में सफर करते समय अपने दोनों तरफ बड़े-बड़े बैग टांगती थी और उनके अंदर हार्डबोर्ड की किताबें रखती थी ताकि कोई मुझे छू न सके। अगर मुझे सीट मिल जाती थी, तो मैं दोनों तरफ बैग रख देती थी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट आपको बहुत कुछ सिखा देता है।”

इंडस्ट्री में कम मौके मिलने का मलाल

अदिति ने इस बात पर भी अपना दुख जाहिर किया कि साल 2001 में ही प्रियंका चोपड़ा (मिस वर्ल्ड) और लारा दत्ता (मिस यूनिवर्स) को जितनी शोहरत और मौके मिले, उन्हें ‘मिसेज वर्ल्ड’ बनने के बावजूद वैसे अवसर नहीं मिले। अदिति के अनुसार, इंडस्ट्री के इस भेदभाव ने उनका दिल दुखाया है।

“अपमान का वो अहसास कभी ठीक नहीं होता”

अदिति का मानना है कि बचपन में हुई ऐसी घटनाएं कभी इंसान के जहन से नहीं जातीं। उन्होंने कहा कि बाजार में हुई एक और घटना ने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया था। “आपको बस ऐसा लगता है कि आपका अपमान हुआ है। वो गलत होने का अहसास कभी पूरी तरह ठीक नहीं होता।”

अदिति गोवित्रिकर की यह कहानी केवल एक सेलिब्रिटी का दर्द नहीं है, बल्कि उन अनगिनत लड़कियों की सच्चाई है जो हर दिन अपनी सुरक्षा के लिए जद्दोजहद करती हैं। अदिति ने इन कड़वी यादों को साझा कर यह संदेश दिया है कि सुरक्षा के प्रति जागरूकता और बचपन में बच्चों से बात करना कितना जरूरी है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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