द लोकतंत्र : भारतीय टेलीविजन के सर्वाधिक लोकप्रिय क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 17’ का हालिया एपिसोड न केवल मनोरंजन, अपितु भावनात्मक संवेदनाओं का केंद्र बन गया। महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने परम मित्र और सह-कलाकार धर्मेंद्र देओल को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें हिंदी फिल्म जगत की ‘अनमोल निशानी’ बताया। अवसर था बच्चन परिवार की तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि, अगस्त्य नंदा की फिल्म ‘इक्कीस’ के प्रमोशन का, जो आज 1 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस दौरान अमिताभ बच्चन की सजल आंखें और धर्मेंद्र के प्रति उनका सम्मान सिनेमा प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण सिद्ध हुआ।
‘इक्कीस’: महान कलाकार का अंतिम उपहार
फिल्म ‘इक्कीस’ को लेकर पूरे उद्योग में एक विशेष उत्सुकता थी, क्योंकि यह ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र की अंतिम ऑन-स्क्रीन प्रस्तुति मानी जा रही है।
- अमिताभ की भावुक टिप्पणी: बिग बी ने रुंधे गले से कहा कि एक कलाकार अपनी अंतिम सांस तक कला की साधना करना चाहता है, और धर्मेंद्र जी ने ठीक वैसा ही किया। उन्होंने धर्मेंद्र को सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक शाश्वत ‘एहसास’ करार दिया, जो हमेशा यादों और दुआओं के रूप में जीवित रहेगा।
- सह-कलाकारों का अनुभव: फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे जयदीप अहलावत ने भी धर्मेंद्र के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इतना बड़ा कद होने के बावजूद धर्मेंद्र सेट पर बिल्कुल पारिवारिक सदस्य की तरह रहते थे, जिससे किसी भी नवागंतुक को असहजता महसूस नहीं होती थी।
‘शोले’ का अनसुना किस्सा: जब वास्तविक पीड़ा बन गई एक्टिंग
अमिताभ बच्चन ने बेंगलुरु में हुई ‘शोले’ की शूटिंग के दिनों को याद करते हुए एक रोमांचक खुलासा किया।
- अमिताभ ने बताया कि धर्मेंद्र शारीरिक रूप से अत्यंत शक्तिशाली थे। फिल्म के क्लाइमेक्स में, जहाँ जय (अमिताभ) दम तोड़ रहा होता है, वहाँ वीरू (धर्मेंद्र) ने इतनी तीव्रता के साथ अमिताभ का हाथ पकड़ा था कि अमिताभ को वास्तविक पीड़ा हुई। उन्होंने हंसते हुए कहा, “उस दृश्य में जो तड़प दिखी, वह अभिनय नहीं बल्कि उनके पहलवानी हाथों का असर था।”
तीसरी पीढ़ी का अभिषेक
- अगस्त्य नंदा का यह डेब्यू बच्चन परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस एपिसोड में श्वेता बच्चन और नव्या नवेली की उपस्थिति ने इस अवसर को एक संपूर्ण पारिवारिक महोत्सव बना दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि धर्मेंद्र जैसे दिग्गज के साथ काम करना अगस्त्य के लिए सीखने का सबसे बड़ा अवसर रहा होगा। यह फिल्म न केवल एक युद्ध नायक की गाथा है, बल्कि दो विभिन्न युगों के अभिनय कौशल का संगम भी है।
निष्कर्षतः, केबीसी का यह एपिसोड हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम अतीत और उभरते भविष्य के बीच एक सेतु सिद्ध हुआ। धर्मेंद्र की विरासत को अमिताभ की आंखों के अश्रुओं ने जो सम्मान दिया, वह दशकों पुरानी दोस्ती की एक सुंदर झांकी है। आज रिलीज हुई ‘इक्कीस’ न केवल अगस्त्य नंदा का भविष्य तय करेगी, बल्कि धर्मेंद्र देओल के प्रशंसकों के लिए उनकी अंतिम कलात्मक स्मृति के रूप में सहेजी जाएगी।

