द लोकतंत्र : बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री और कमिडियन अर्चना पूरन सिंह और उनके पति परमीत सेठी ने हाल ही में अपने यूट्यूब व्लॉग के माध्यम से दर्शकों को श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर के आध्यात्मिक सफर पर ले गए। परिवार ने आश्रम में न सिर्फ सात्विक भोजन का आनंद लिया, बल्कि गौशाला में जाकर गौसेवा भी की। व्लॉग का सबसे खास पहलू उनके बेटे आयुष्मान के करियर और सफलता पर गुरुजी द्वारा दिए गए मार्गदर्शन को माना जा रहा है।
परमीत और आयुष्मान की गौसेवा और सात्विक भोजन
आश्रम में अर्चना के बेटे आर्यमन और परमीत ने बड़ी लगन से गौसेवा की।
- गौशाला का अनुभव: परमीत सेठी ने गौशाला में गाय के गोबर को अपने हाथों से इकट्ठा करते हुए कहा कि यह देखने में आसान लगता है, लेकिन इसमें बहुत ताकत लगती है। अर्चना ने इस दौरान बताया कि आश्रम में हर जाति की गायों को अलग-अलग रखा जाता है। गौसेवा के बाद परिवार ने शुद्ध दूध और घी की मिठाई का आनंद लिया।
- सात्विक भोजन: आश्रम के सात्विक भोजन का लुत्फ उठाते हुए अर्चना ने लौकी के रस वाले जूस की तारीफ की और कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि वह इतना स्वादिष्ट लग सकता है।
आयुष्मान को मिला पहला ब्रेक और गुरुजी की शिक्षा
आश्रम के दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य बेटों को गुरुजी से मार्गदर्शन दिलवाना था। आयुष्मान ने बताया कि उन्हें सैकड़ों रिजेक्शन के बाद पहला एक्टिंग प्रोजेक्ट मिल गया है। जिसकी शूटिंग में व्यस्तता के बावजूद वे मुश्किल से दो घंटे सोकर गुरुजी से मिलने आए हैं।
- गुरुजी के गुर: श्री श्री रविशंकर ने आयुष्मान और उनके भाई को एक्टिंग में सफलता का मंत्र दिया । उन्होंने कहा कि किसी भी काम में फोकस रखना जरूरी है और किरदार में पूरी तरह से घुस जाना चाहिए। गुरुजी ने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर आप कृष्णा का किरदार निभा रहे हैं तो कृष्ण की तरह बनना जरूरी है। वैसे ही विलेन का भी किरदार हो तो विलेन की तरह सोचना जरूरी है।”
आश्रम की आध्यात्मिक खोज
अर्चना ने आश्रम के गुरुकुल का भी जायजा लिया, जहां हर तरह के वेदों का ज्ञान दिया जाता है। इसके अलावा, उन्होंने श्री श्री रविशंकर के सेंटर में रखे गए सोमनाथ मंदिर के असली अवशेषों के भी दर्शन किए। अर्चना ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “जब भी मैं आश्रम आती हूं, और भी चौंक जाती हूं। मैंने सुना बहुत है पहले, लेकिन एक्सपीरियंस करना अलग है।” इस दौरे ने स्पष्ट कर दिया है कि सेठी परिवार के लिए आध्यात्मिकता सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

