द लोकतंत्र : भारतीय टेलीविजन की लोकप्रिय कॉमेडियन और होस्ट भारती सिंह के घर एक बार फिर किलकारियां गूँजी हैं। बीते 19 दिसंबर को भारती ने अपने दूसरे बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम उनके बड़े बेटे लक्ष्य (गोला) ने प्यार से ‘काजू’ रखा है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर लौटीं भारती ने अपने डिजिटल मंच (व्लॉग) के जरिए फैंस को निरंतर अपडेट दिए हैं। हालांकि, इस खुशी के बीच भारती एक गंभीर मदर्स गिल्ट और चिंता से गुजर रही हैं, जो अक्सर दो बच्चों की माताओं में देखी जाती है— बड़े बच्चे की भावनात्मक सुरक्षा।
सिबलिंग बॉन्डिंग: गोला की प्रतिक्रिया और भारती का डर
भारती सिंह ने अपने लेटेस्ट व्लॉग में स्वीकार किया कि वे शुरुआत से ही इस बात को लेकर शंकित थीं कि गोला अपने छोटे भाई को कैसे अपनाएगा।
- भारती ने बताया कि जब उन्होंने काजू को फीड करवाया, तो गोला के चेहरे पर असुरक्षा के भाव थे। उसकी नजरों में यह सवाल था कि माँ किसी और के इतने करीब क्यों है। भारती ने भावुक होते हुए कहा, “मेरे लिए दोनों मेरी आँखों जैसे हैं, मगर मैं गोले को यह बिल्कुल भी एहसास नहीं होने देना चाहती थी कि मेरा प्यार बंट गया है।”
- चिंताओं के बावजूद, गोला ने बड़े भाई की जिम्मेदारी समझना शुरू कर दिया है। वह नर्सिंग स्टाफ से भी काजू को बचाते हुए कहता है, “ये हमारा बेबी है, इसे छोड़ो।”
बड़े बच्चे को कैसे संभालें?
बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे बच्चे के आगमन पर बड़े बच्चे को अतिरिक्त ‘पैम्परिंग’ और महत्व देना अनिवार्य है। भारती और हर्ष भी यही रणनीति अपना रहे हैं। वे गोला को काजू की देखभाल में शामिल कर रहे हैं ताकि उसके मन में ईर्ष्या के बजाय अपनत्व पैदा हो।
सोशल मीडिया और फैंस का समर्थन
भारती सिंह ने फिलहाल काजू का चेहरा सार्वजनिक नहीं किया है, किंतु उसकी स्वस्थ होने की पुष्टि की है। फैंस भारती की ईमानदारी और उनके पेरेंटिंग के प्रति पारदर्शी रवैये की सराहना कर रहे हैं। इंटरनेट पर लोग इसे ‘परफेक्ट फैमिली’ बता रहे हैं और भारती को मजबूत रहने की सलाह दे रहे हैं।
आगामी समय में भारती सिंह काम पर वापसी की योजना भी बना रही हैं, किंतु उनकी प्राथमिकता फिलहाल दोनों बेटों के बीच एक मजबूत रिश्ता कायम करना है। वे चाहती हैं कि गोला, काजू को केवल छोटा भाई ही नहीं, बल्कि एक अभिभावक की भांति संरक्षण दे।
निष्कर्षतः, भारती सिंह का यह व्लॉग उन लाखों माताओं की कहानी है जो एक साथ दो शिशुओं की भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करती हैं। खुशी और चिंता का यह मिश्रण ही मातृत्व की खूबसूरती है।

