द लोकतंत्र : भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी की 101वीं जयंती के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आयोजित एक भव्य संगीत संध्या विवादों के घेरे में आ गई है। मशहूर सूफी गायक कैलाश खेर का यह कॉन्सर्ट प्रारंभ में अत्यंत उत्साहजनक रहा, किंतु दर्शकों के एक वर्ग द्वारा किए गए हुड़दंग ने इसे एक कटु अनुभव में बदल दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि गायक को न केवल अपना प्रदर्शन बीच में रोकना पड़ा, अपितु मंच से भीड़ को ‘जानवर’ तक कहना पड़ा।
25 दिसंबर की रात ग्वालियर में आयोजित इस कार्यक्रम में भीड़ की संख्या अपेक्षा से अधिक हो गई।
जैसे ही कैलाश खेर ने श्रोताओं को समीप आने का आह्वान किया, स्थितियां अनियंत्रित हो गईं। सैकड़ों लोग बैरिकेड्स को लांघकर मंच की ओर दौड़ने लगे।
गायक ने तत्काल चेतावनी दी कि यदि कोई भी वाद्ययंत्रों या महंगे इक्विपमेंट्स के निकट आया, तो शो बंद कर दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वे कहते दिखे, “हमने आपकी इतनी प्रशंसा की और आप जानवरगिरी कर रहे हैं… कृपया सभ्य बनें।”
इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की इंतजामों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कैलाश खेर ने स्वयं मंच से पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई, ताकि कलाकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। किंतु, जब भीड़ पर काबू पाना असंभव हो गया, तो निराश गायक ने परफॉर्मेंस को वहीँ विराम देना ही उचित समझा और मंच से चले गए।
इवेंट मैनेजमेंट विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े कलाकारों के ओपन-एयर कॉन्सर्ट्स में ‘क्राउड मैनेजमेंट’ विफल होने से न केवल कलाकारों का अपमान होता है, बल्कि शहर की छवि भी धूमिल होती है। ग्वालियर जैसे सांस्कृतिक शहर में अटल जी की जयंती पर हुई यह घटना एक दुखद मिसाल है। भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए अधिक कठोर सुरक्षा नियम और डेटा-संचालित भीड़ नियंत्रण तकनीक की आवश्यकता है।
कैलाश खेर का गुस्सा एक कलाकार की पीड़ा को दर्शाता है, जो सभ्य समाज में अराजकता देखकर आहत था। अटल बिहारी बाजपेयी, जो स्वयं सादगी और अनुशासन के प्रतीक थे, उनकी स्मृति में हुए कार्यक्रम का इस प्रकार समाप्त होना चिंतनीय है।

