द लोकतंत्र : भारतीय सिनेमा के इतिहास में फिल्मी किरदारों का चुनाव अक्सर अभिनेताओं के भविष्य की दिशा निर्धारित करता है। हाल ही में सुपरस्टार सलमान खान का एक पुराना साक्षात्कार पुनः प्रकाश में आया है, जिसने 90 के दशक की कल्ट क्लासिक फिल्म ‘बाजीगर’ और संजय लीला भंसाली की ‘देवदास’ को लेकर नए तथ्य उजागर किए हैं। जहाँ एक ओर शाहरुख खान ने इन फिल्मो के माध्यम से सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ, वहीं सलमान खान ने अपनी विशिष्ट विचारधारा और सामाजिक उत्तरदायित्व के कारण इन प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाए रखी।
बाजीगर का रिजेक्शन
वर्ष 1993 में अब्बास-मस्तान के निर्देशन में बनी ‘बाजीगर’ प्रारंभिक स्तर पर सलमान खान को प्रस्तावित की गई थी। किंतु सलमान ने इसे अस्वीकार कर दिया।
- छवि की शुचिता: सलमान खान के अनुसार, वे प्रारंभ से ही ऐसे किरदार निभाने के इच्छुक थे जो युवा पीढ़ी के समक्ष सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें। उनका तर्क था कि प्रेम के लिए आत्महत्या करना या अत्यधिक प्रतिशोधी होना एक गलत संदेश प्रेषित करता है।
- शाहरुख के लिए वरदान: शाहरुख खान ने इस जोखिमभरे ‘एंटी-हीरो’ किरदार को स्वीकार किया। महज ₹2 करोड़ के परिव्यय में निर्मित इस फिल्म ने ₹14 करोड़ का व्यापार करके शाहरुख को रातों-रात स्टारडम के शिखर पर पहुंचा दिया।
‘देवदास’ और भंसाली संग समीकरण
संजय लीला भंसाली के साथ ‘खामोशी’ और ‘हम दिल दे चुके सनम’ जैसी सफल फिल्में करने के बावजूद, सलमान को ‘देवदास’ में कास्ट नहीं किया गया।
- इस विषय पर स्पष्टता देते हुए सलमान ने कहा कि उन्हें भंसाली से कोई शिकायत नहीं थी। उनका मानना था कि ‘देवदास’ का चरित्र एक हारा हुआ इंसान है जो गलत रास्ते चुनता है, और वे निजी तौर पर ऐसे चरित्रों के प्रोत्साहन के पक्षधर नहीं थे। यह साक्षात्कार दर्शाता है कि 90 के दशक में भी सुपरस्टार अपनी ‘स्क्रीन इमेज’ को लेकर अत्यंत सजग थे।
‘बैटल ऑफ गलवान’ की तैयारी
वर्तमान परिदृश्य की ओर दृष्टि डालें तो सलमान खान अब पूरी तरह से देशभक्ति और सशक्त भूमिकाओं पर केंद्रित हैं। अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बन रही उनकी आगामी फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ इसका प्रमाण है।
- यह फिल्म 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होने के लिए प्रस्तावित है। ‘सिकंदर’ की असफलता के बाद, यह प्रोजेक्ट सलमान के लिए बॉक्स ऑफिस पर वापसी का एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। चित्रांगदा सिंह के साथ उनकी नई केमिस्ट्री दर्शकों के बीच पहले ही कौतूहल जगा चुकी है।
निष्कर्षतः, बॉलीवुड में रिजेक्शन की कहानियां अक्सर सफलता के नए अध्याय लिखती हैं। सलमान खान द्वारा छोड़ी गई फिल्में जहाँ शाहरुख खान के करियर का स्तंभ बनीं, वहीं इसने सलमान को एक ऐसी मास-अपील (Mass-appeal) छवि दी जिसमें नायक कभी हारता नहीं। 2026 का बॉक्स ऑफिस तय करेगा कि सुपरस्टार का यह सिद्धांत आगामी समय में कितना प्रभावी सिद्ध होता है।

