द लोकतंत्र : भारतीय सिनेमा की सशक्त अभिनेत्री शेफाली शाह, जो अपनी गंभीर अदाकारी के लिए जानी जाती हैं, ने अपने निजी जीवन के एक अत्यंत अंधकारमय अध्याय से पर्दा उठाया है। हर्ष छाया के साथ अपने विवाह विच्छेद के 26 वर्ष पश्चात, शेफाली ने उस ‘इमोशनल अब्यूज’ (मानसिक शोषण) पर बेबाकी से चर्चा की है जिसने उन्हें लगभग ‘खत्म’ कर दिया था। एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पहली शादी उनके अस्तित्व के लिए ‘जहर’ समान बन गई थी, और यदि वह उस समय साहसिक निर्णय नहीं लेतीं, तो शायद आज वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी होतीं।
मानसिक शोषण का चक्र: जब रिश्ते बोझ बन जाते हैं
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, शारीरिक हिंसा की तुलना में भावनात्मक शोषण (Emotional Abuse) अधिक घातक हो सकता है क्योंकि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को धीरे-धीरे नष्ट कर देता है।
- आत्म-सम्मान की बलि: शेफाली ने बताया कि उन्हें लंबे समय तक यह महसूस कराया गया कि वह अपने आप में अपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि एक टॉक्सिक रिश्ते में सामने वाला आपकी अहमियत समझने के बजाय आपको कमतर आंकने की कोशिश करता है। यह अहसास कि ‘अब और सहना मुमकिन नहीं’, उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
- अस्तित्व का संकट: अभिनेत्री के अनुसार, एक समय ऐसा आया जब उन्हें लगने लगा कि वह इस शादी के भीतर ‘मर’ रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने स्वयं को बचाने के लिए उस रिश्ते से बाहर निकलने का विकल्प चुना, क्योंकि वह रिश्ता उनकी पहचान और मानसिक शांति को लील रहा था।
“मैं पिज्जा नहीं हूं”: सामाजिक अपेक्षाओं का परित्याग
शेफाली शाह का यह वक्तव्य आज की पीढ़ी के लिए एक सशक्त संदेश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज और रिश्तों की अपेक्षाओं के बोझ तले दबकर स्वयं को खो देना बुद्धिमानी नहीं है।
- स्व-प्रेम की प्राथमिकता: शेफाली ने कहा, “मैं अब अपने लिए जिऊंगी।” उन्होंने यह स्वीकार किया कि उम्र के साथ उन्होंने हर किसी को खुश करने की प्रवृति छोड़ दी है। उनका रूपक “मैं पिज्जा नहीं हूं” यह दर्शाता है कि हर व्यक्ति को प्रसन्न रखना असंभव है और अपनी खुशी का उत्तरदायित्व स्वयं व्यक्ति पर होता है।
- अतीत से पुनर्प्राप्ति: 1994 में हर्ष छाया से विवाह और 2000 में तलाक के बाद, शेफाली ने फिल्म निर्माता विपुल शाह के साथ नया जीवन आरंभ किया। आज वह दो बेटों की मां हैं और एक सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रही हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि टॉक्सिक अतीत से बाहर निकलकर सुखद भविष्य का निर्माण संभव है।
भविष्य का प्रभाव: जागरूक समाज की ओर कदम
- शेफाली शाह जैसे सार्वजनिक व्यक्तित्वों द्वारा घरेलू और मानसिक शोषण पर खुलकर बोलना समाज में व्याप्त ‘शादी को हर कीमत पर निभाने’ के दबाव को कम करता है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि ऐसे बयानों से उन महिलाओं को बल मिलता है जो चुपचाप अपमान सह रही हैं। आने वाले समय में, मानसिक स्वास्थ्य और वैवाहिक परामर्श (Marriage Counselling) के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आने की उम्मीद है, जहाँ ‘आत्म-सम्मान’ को ‘समझौते’ से ऊपर रखा जाएगा।
निष्कर्षतः, शेफाली शाह की यह आपबीती मात्र एक फिल्मी सितारे की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की आवाज है जो भावनात्मक शोषण के चक्रव्यूह में फंसे हैं। उनका यह कहना कि “इंसान मुश्किलों से गुजरकर ही सीखता है”, जीवन के प्रति एक परिपक्व दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह स्पष्ट है कि गरिमाविहीन रिश्ता ढोने से बेहतर गरिमापूर्ण अकेलापन है।

