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रायबरेली में भावुक क्षण: राहुल गांधी को सौंपा गया दादा फिरोज गांधी का दशकों पुराना ड्राइविंग लाइसेंस

An emotional moment in Raebareli: Rahul Gandhi was handed his grandfather Feroze Gandhi's decades-old driving license.

द लोकतंत्र/ रायबरेली : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के रायबरेली दौरे के दौरान एक ऐसा भावुक और ऐतिहासिक क्षण सामने आया, जिसने राजनीति से परे स्मृतियों और विरासत को केंद्र में ला दिया। मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक स्थानीय नागरिक ने राहुल गांधी को उनके दादा फिरोज गांधी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा। यह केवल एक दस्तावेज़ नहीं था, बल्कि देश के पहले लोकतांत्रिक दौर की एक जीवित स्मृति थी, जिसे दशकों तक सहेजकर रखा गया था।

गांधी परिवार की अमानत है, और उन तक पहुंचना चाहिए

राहुल गांधी के रायबरेली दौरे के दूसरे दिन यह क्षण तब आया, जब विकास सिंह नामक व्यक्ति मंच तक पहुंचे और राहुल गांधी को लाइसेंस सौंपा। विकास सिंह ने बताया कि यह ड्राइविंग लाइसेंस वर्षों पहले एक कार्यक्रम के दौरान उनके ससुर को मिला था। उस समय इसकी ऐतिहासिक अहमियत को समझते हुए उनके ससुर ने इसे संभालकर रखा। बाद में ससुर के निधन के बाद विकास सिंह की सास ने भी इसे एक धरोहर की तरह सुरक्षित रखा। परिवार के लिए यह कागज नहीं, बल्कि इतिहास का एक हिस्सा था।

विकास सिंह के अनुसार, जैसे ही उन्हें राहुल गांधी के रायबरेली आगमन की सूचना मिली, उनकी सास ने भावुक होते हुए कहा कि ‘यह आपकी नहीं, गांधी परिवार की अमानत है, और इसे उसी तक पहुंचना चाहिए।’ इसी भावना के साथ विकास सिंह यह लाइसेंस लेकर राहुल गांधी के पास पहुंचे। मंच पर जब यह दस्तावेज़ राहुल गांधी को सौंपा गया, तो वहां मौजूद लोग भी उस पल की गंभीरता और भावनात्मक गहराई को महसूस कर रहे थे।

राहुल ने माँ सोनिया को भेजी तस्वीर

अपने दादा का ड्राइविंग लाइसेंस हाथ में लेते ही राहुल गांधी कुछ क्षणों तक उसे देखते रहे। बताया जा रहा है कि उन्होंने वहीं से तुरंत अपनी मां सोनिया गांधी को इसकी तस्वीर भेजी। यह एक निजी पारिवारिक क्षण था, जो सार्वजनिक मंच पर इतिहास और भावनाओं के संगम में बदल गया। इसके बाद राहुल गांधी ने उस लाइसेंस को अपने पास सुरक्षित रख लिया।

गौरतलब है कि फिरोज गांधी का रायबरेली से गहरा और ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। दिसंबर 1912 में जन्मे फिरोज गांधी ने स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव, वर्ष 1952 में, रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज कर संसद पहुंचे थे। वे न सिर्फ एक सांसद थे, बल्कि भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों पर मुखर आवाज़ के रूप में भी जाने जाते थे। 7 सितंबर 1960 को उनके निधन के बाद भी रायबरेली में उनका नाम और योगदान आज तक स्मृतियों में जीवित है। दशकों बाद सामने आया यह ड्राइविंग लाइसेंस न सिर्फ गांधी परिवार की व्यक्तिगत धरोहर है, बल्कि रायबरेली और भारतीय लोकतंत्र के शुरुआती इतिहास का भी एक साक्ष्य बनकर उभरा है।

Team The Loktantra

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