द लोकतंत्र/ पटना : बिहार की राजधानी पटना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनज़र महागठबंधन ने अतिपिछड़ा समाज के लिए विशेष संकल्प पत्र जारी किया। इस मौके पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर इंडिया गठबंधन सत्ता में आया तो आरक्षण की मौजूदा 50% सीमा को समाप्त कर दिया जाएगा और सामाजिक न्याय को नए आयाम दिए जाएंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि वोटर अधिकार यात्रा के जरिए हमने लोगों को बताया कि कैसे संविधान खतरे में है और जनता के अधिकार छीने जा रहे हैं। उन्होंने वादा किया कि सत्ता में आने पर अति पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों को उनका पूरा हक मिलेगा। राहुल ने यह भी घोषणा की कि 25 करोड़ रुपये से अधिक के सभी सरकारी ठेकों में 50% आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों को भी समान अवसर मिल सके।
क्या है संकल्प पत्र की ख़ास बातें
महागठबंधन के इस संकल्प पत्र में कई बड़े वादे किए गए हैं। इसमें सबसे अहम है अतिपिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम बनाने का ऐलान, जो ईबीसी समाज को विशेष सुरक्षा देगा। पंचायत और नगर निकाय में वर्तमान 20% आरक्षण बढ़ाकर 30% करने का वादा भी किया गया है। इसके अलावा नियुक्तियों में “Not Found Suitable” (NFS) की अवधारणा को अवैध घोषित करने की बात कही गई है।
संकल्प पत्र में आरक्षण की सीमा को तोड़ने और उसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि इसे कानूनी चुनौती से बचाया जा सके। साथ ही, अति पिछड़ा वर्ग की सूची में अधिक या कम समावेशन से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए एक विशेष समिति गठित करने का आश्वासन दिया गया है।
भूमिहीन परिवारों के लिए भी बड़ा वादा किया गया है। महागठबंधन ने कहा है कि शहरी क्षेत्रों में 3 डिसमिल और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 डिसमिल आवासीय भूमि दी जाएगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनमें आरटीई 2010 के तहत प्राइवेट स्कूलों में आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा अतिपिछड़ा, एससी, एसटी और पिछड़े वर्गों के बच्चों के लिए सुरक्षित किया जाएगा।
सरकारी ठेकों में 50% आरक्षण के प्रावधान का संकल्प
इतना ही नहीं, 25 करोड़ रुपये तक के सरकारी ठेकों में 50% आरक्षण का प्रावधान करने की घोषणा की गई है। निजी शिक्षण संस्थानों में भी संविधान की धारा 15(5) के अंतर्गत आरक्षण लागू करने का संकल्प लिया गया है। इसके अलावा एक उच्च स्तरीय आरक्षण नियामक प्राधिकरण बनाया जाएगा, जो आरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं पर निगरानी रखेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकल्प पत्र महागठबंधन की ओर से अति पिछड़ा वर्ग को लुभाने की सीधी रणनीति है। बिहार की राजनीति में ईबीसी समाज हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है और ऐसे में यह घोषणा बीजेपी के लिए चुनौती साबित हो सकती है। राहुल गांधी के बयान और संकल्प पत्र की घोषणाओं से साफ है कि आगामी चुनाव में मुकाबला विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सिमटता दिख रहा है।

