द लोकतंत्र/ पटना : बिहार चुनाव 2025 के दूसरे चरण से पहले सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। मधुबनी सहित भारत–नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों में प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। चुनाव आयोग के निर्देश पर सीमा सुरक्षा को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाया गया है ताकि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण और पारदर्शी माहौल में संपन्न हो सके।
पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को सम्पन्न होने के बाद अब दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोटिंग होनी है। इस दौरान सीमावर्ती मधुबनी जिला विशेष फोकस में है, क्योंकि भूगोल और सीमा की खुली प्रकृति के कारण यहां सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। प्रशासन ने मतदान से पहले संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाने और अवैध आवाजाही रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।
72 घंटे तक बंद रहेगी जयनगर–जनकपुर इंडो-नेपाल ट्रेन
चुनाव के दौरान सीमा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जयनगर-जनकपुर इंडो-नेपाल ट्रेन सेवा को 72 घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया है। नेपाली रेलवे स्टेशन मास्टर एस.एल. मीणा ने पुष्टि की कि दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। समझौते के अनुसार, यह ट्रेन 9 नवंबर से 11 नवंबर की मध्यरात्रि तक बंद रहेगी और 12 नवंबर से पुनः सामान्य संचालन शुरू होगा।
ट्रेन बंद रहने से भारत और नेपाल के बीच सफर करने वाले यात्रियों को असुविधा होगी, लेकिन प्रशासन का मानना है कि चुनाव के दौरान यह कदम ‘सुरक्षा सर्वोपरि’ सिद्धांत के तहत आवश्यक है।
8 नवंबर से नेपाल सीमा पूरी तरह सील
ट्रेन सेवा के अलावा भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा को भी 8 नवंबर की रात 12 बजे से सील किया जाएगा। यह प्रतिबंध मतदान समाप्त होने तक लागू रहेगा। इस अवधि में किसी भी व्यक्ति को सीमा पार करने की अनुमति नहीं होगी। सीमा क्षेत्र में स्मगलिंग, अवैध आवाजाही, नकदी और शराब की तस्करी सहित किसी भी संभावित चुनावी हस्तक्षेप को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
नेपाल के धनुषा जिला प्रशासन ने भी इस फैसले को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियाँ संयुक्त रूप से गश्त बढ़ा रही हैं।
सीमा चौकियों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात
सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए SSB की 48वीं बटालियन, जिला पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों पर विशेष विजिलेंस रखी जा रही है। मोबाइल पेट्रोलिंग, ड्रोन निगरानी और इंटेलिजेंस नेटवर्क भी सक्रिय किया गया है। प्रशासन ने सीमावर्ती गांवों के निवासियों से अपील की है कि वे बिना आवश्यकता सीमा की ओर न जाएँ और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने में सहयोग करें।
मतदान से पहले सुरक्षा क्यों ज़रूरी?
सीमावर्ती जिलों में चुनावी मौसम में
- नकदी और शराब की तस्करी
- संदिग्ध तत्वों की आवाजाही
- अवैध हथियार सप्लाई जैसी आशंकाएँ अधिक रहती हैं। इसलिए प्रशासन इस क्षेत्र में किसी भी जोखिम को कम करना चाहता है।
दूसरे चरण की वोटिंग से पहले सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित हो, और बाहरी हस्तक्षेप की कोई संभावना न बचे।

