द लोकतंत्र/ कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नंदीग्राम से बड़ा सियासी संदेश सामने आया है। नंदीग्राम कोऑपरेटिव एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट कमेटी के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए सभी 9 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक भी सीट नहीं मिल सकी। इस जीत के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला और नंदीग्राम में जश्न मनाया गया।
यह जीत इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि नंदीग्राम, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी का विधानसभा क्षेत्र है। यहीं से उन्होंने वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी। ऐसे में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह परिणाम बीजेपी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला और TMC के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
2026 चुनाव से पहले BJP को मिली रणनीतिक बढ़त
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सहकारी समिति जैसे स्थानीय चुनाव अक्सर जमीनी स्तर की राजनीतिक पकड़ को दर्शाते हैं। नंदीग्राम में सभी सीटों पर बीजेपी की जीत यह संकेत देती है कि क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक ताकत मजबूत बनी हुई है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है, यह परिणाम बीजेपी के लिए एक मजबूत राजनीतिक संदेश देता है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह जीत जनता के भरोसे और TMC सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष का नतीजा है। वहीं, TMC की ओर से इस चुनावी हार पर फिलहाल कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ममता बनर्जी के बयान पर BJP का पलटवार
इस बीच बीजेपी विधायक शंकर घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयान पर तीखा हमला बोला है, जिसमें उन्होंने बीजेपी को “हिलाने” की बात कही थी। शंकर घोष ने कहा कि ममता बनर्जी को याद रखना चाहिए कि 2021 में नंदीग्राम में उन्हें पहले ही “हिला दिया गया” था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हारने के बाद भी “कम्पार्टमेंटल मुख्यमंत्री” बनकर विधानसभा में दाखिल हुईं, जो पूरे राज्य के लिए शर्मनाक है।
शंकर घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस तरह के ‘फिल्मी डायलॉग’ देने के बजाय समझदारी से बात करनी चाहिए, क्योंकि इस तरह के बयान राज्य के विकास में कोई मदद नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर राजनीति की जरूरत है, न कि भावनात्मक और उत्तेजक बयानों की।
नंदीग्राम बना फिर सियासी संकेतक
नंदीग्राम पहले भी बंगाल की राजनीति में बड़े बदलावों का गवाह रहा है और अब एक बार फिर यह इलाका राजनीतिक संकेत दे रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इस सहकारी चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि नंदीग्राम अब भी बीजेपी का मजबूत गढ़ बना हुआ है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC इस झटके से कैसे उबरती है और बीजेपी इस बढ़त को किस तरह चुनावी रणनीति में बदलती है।

